राम के ईश्वर रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

राम के ईश्वर रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग
रामेश्वरम का अर्थ संस्कृत में “राम के भगवान” (राम-ईश्वरम) है, जो रामनाथस्वामी मंदिर के पीठासीन देवता शिव का एक विशेषण है।
मान्यता है कि जब श्री राम को इस शिवलिंग के पूजन से ब्रह्म हत्या जैसे पाप से मुक्ति मिली सकती है तो सामान्य शिव भक्त के लिए रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से सभी पापों से मुक्ति सहज है।
*रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की कथा*
तमिलनाडु में समुद्र तट पर स्थित इस मंदिर को रामायणकालीन माना जाता है. मान्यता है कि अयोध्या के राजा भगवान श्री राम ने लंकापति रावण से युद्ध करने से पहले विजय की कामना लिए हुए इसी स्थान पर रेत का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की साधना की थी. जिसके बाद भगवान शिव यहां ज्योति रूप में प्रकट हुए. मान्यता है कि जब राम लंका विजय करके लौटे तो उन्होंने ऋषि-मुनियों ने उन्हें ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए शिव पूजन के लिए कहा. जिस भगवान राम ने हनुमान जी को कैलाश जाकर शिवलिंग जाने को कहा. इसके बाद जब हनुमान जी को शिवलिंग लाने में देर लगी तो माता सीता ने अपने हाथ से शिवलिंग बनाया और भगवान राम ने पूजा की. उस शिवलिंग को आज रामेश्वरम के नाम से जाना जाता है. इसके बाद हनुमान जी जिस शिवलिंग को लेकर आए उसे भी वहीं स्थापित किया गया है, जिसे हनुमदीश्वर के नाम से जाना जाता है.
*24 कुओं के पवित्र जल से दूर होते हैं सारे पाप*
रामेश्वरम मंदिर के भीतर 24 कुएं हैं. लोग इन कुओं को पावन तीर्थ के समान पूजते और इसके जल से स्नन करते हैं. मान्यता है कि इन पवित्र कुओं के पानी से नहाने मात्र से ही लोगों के सारे पाप कट जाते हैं. इन कुओं के बारे में मान्यता है कि इन्हें भगवान श्री राम ने अपनी बाण से बनाया था.
*संजीव शंकर अध्यक्ष महामृत्युंजय सेवा मिशन*

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