दुनिया में जीने का तरीका सिखाता है कुरान – मुफ्ती अब्दुल गफूर क़ासमी

दुनिया में जीने का तरीका सिखाता है कुरान – मुफ्ती अब्दुल गफूर क़ासमी

उमेश गुप्ता जी न्यूज़ इंडिया जिला संवाददाता संभल

संभल।मदरसा इशातुल कुरान में सालाना जलसे का आयोजन किया गया।जिसमें 6 बच्चों की दस्तारबंदी की गई।
उपनगरी सराय तरीन मुहल्ला भूड़ा स्थित मदरसा इशातुल कुरान के सालाना जलसे की शुरुआत क़ारी मुहम्मद रिज़वान ने तिलावते कुरआन से की।
और फरमान रसूल ने नाते पेश की।
जलसे की निज़ामत मौलाना कारी उम्मेद ने की।
जलसे की सदारत अब्दुल मुईद क़ासमी ने की।
जलसे को खिताब करते हुए मौलाना मुफ्ती अब्दुल गफूर क़ासमी ने कहा कि कुरान की तालीम हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है ।क्योंकि कुरान एक किताब नहीं , बल्कि दुनिया में जीने का तरीका है।
कुरान पाक अल्लाह का कलाम है। खुशनसीब है। वह मां बाप जिनके बच्चों ने कुरान पाक को अपने सीनों में महफूज़ कर लिया है।
कुरान अल्लाह का मुकद्स कलाम है
अल्लाहताला ने अपनी उम्मत को कुरान को उठाने की , वह ताकत दी है।जो बड़े बड़े पहाड़ों को भी नहीं मिली। जब कुरान नाज़िल हुआ था , तो पहाड़ भी लरज़ गए थे।
दरअसल कुरआन इस्लाम मज़हब की एक मुकद्दस किताब है, ।जिसमें इंसानों के लिए इंसानियत और ज़िंदगी गुज़ारने का पूरा तरीका मौजूद है। जिस पर अमल करने से इंसान परहेज़गार (यानी की बुरी बातों और गुनाहों से खुद भी बचने और दूसरो को भी रोकने वाला) बन जाता है. कुरान को समझ कर पढ़ना और उसकी बातों पर अमल करना भी महत्वपूर्ण होता है. तब जाकर इंसान एक कामिल मोमिन और अच्छा इंसान बनता है, जो खुद भी गुनाहों और बुरी बातो से बचता है,और दूसरो को भी गुनाह करने और बुरी बातो से रोकने के लिए ताक़ीद करता है.

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सराय तरीन की जामा मस्ज़िद के शाही इमाम मौलाना मुफ्ती रियाज़ उल हक़ क़ासमी ने कहा कि अल्लाह ने सुबह-ए-कयामत तक के
इंसानों के लिए कुराने मुकद्दस को किताबे हिदायत बनाकर उतारा है। अल्लाह ने कुरान की हिफाज़त की ज़िम्मेदारी भी ली है। अब कोई चाह कर भी इसमें कोई तबदीली नहीं कर सकता।
अल्लाह ने कुरान को कयामत तक के इंसानों के लिए किताबें हिदायत बनाकर उतारा है और कयामत तक इसको अल्फाजो मआनी के ऐतिबार से महफूज़ भी रखा है ।अल्लाह ने इस किताब की हिफाज़त का वादा खुद कुरान में किया है। अब कोई इसे बदलना चाहे तो भी बदल नहीं सकता, अगर किसी ने इसमें तब्दीली किये जाने की बात की तो, वह कुरान की जबान में ही इस्लाम से खारिज माना जायेगा। मौलाना ने कहा घर में अगर कोई हाफ़िज़ या आलिम है ।तो घर के दूसरे लोगों और बस्ती वालों की ज़िम्मेदारी है , कि वह इसके खर्च की इंतेजाम करें।

उन्होंने कहा कि माँ-बाप को चाहिये कि वो अपने बच्चों को कुरान की तालीम दे, और अच्छे तरबीयत सिखाएं।
जलसे में आठ हाफ़िज़े कुरान करने वाले
मुहम्मद सुफियान, मुहम्मद साद, मुहम्मद , सुमाईल, मुहम्मद कलीम, मुहम्मद माज़, अब्दुल रहमान की दसतार बंदी की गई।

कार्यक्रम के अंत में मुल्क के अमनो अमन के लिये दुआ की गई।
इस अवसर पर हाजी मुहम्मद हनीफ, डाक्टर इशरत, हसीब अहमद,हाजी ताहिर, मुहम्मद रिज़वान आदि मौजूद रहे।