विवाह नहीं ज्योति लिंग प्राकट्य दिवस है महाशिवरात्रि -संजीव शंकर

विवाह नहीं ज्योति लिंग प्राकट्य दिवस है महाशिवरात्रि -संजीव शंकर

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वैसे तो हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि उस माह की शिवरात्रि कहलाती है परंतु फाल्गुन मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को “महाशिवरात्रि” कहा जाता है, यह पर्व भगवान शिव के प्राकट्य का पर्व है नाकि विवाह का।महामृत्युंजय सेवा मिशन अध्यक्ष संजीव शंकर ने संशय दूर करते हुए बताया कि महाशिवरात्रि को शिव और पार्वती विवाह नहीं हुआ था, शिव पुराण के अनुसार शिव पार्वती का विवाह मार्गशीष माह के रोहिणी नक्षत्र को सोमवार के दिन हुआ था, अतः महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्मा और विष्णु के बीच में हो रहे विवाद को शांत करने के लिए भगवान शिव ज्योति स्वरूप अग्नि स्तंभ के रुप प्रकट हुए थे, इस तीर्थ को “अरुणाचलेश्वर तीर्थ” के नाम से जाना जाता है। अरुणाचलेश्वर तीर्थ की महिमा के विषय में संजीव शंकर ने बताया कि काशी में मरण अर्थात् काशी में शरीर चाहिए परंतु मरते समय यदि अरुणाचलेश्वर तीर्थ याद भी रहे जाए तो भी मोक्ष ही मिलता है।