संगीत हमारे जीवन का आधार है

संगीत हमारे जीवन का आधार है

संगीत हमारे जीवन का आधार है !

आजकल संगीत द्वारा बहुत सी बीमारियों का इलाज किया जाने लगा है! चिकित्सा विज्ञान भी यह मानने लगा हैं कि प्रतिदिन 20 मिनट अपनी पसंद का संगीत सुनने से रोज़मर्रा की होने वाली बहुत सी बीमारियो से निजात पायी जा सकती है।
जिस प्रकार हर रोग का संबंध किसी ना किसी ग्रह विशेष से होता हैं उसी प्रकार संगीत के हर सुर व राग का संबंध किसी ना किसी ग्रह से अवश्य होता है। यदि किसी व्यक्ति को किसी ग्रह विशेष से संबन्धित रोग हो और उसे उस ग्रह से संबन्धित राग, सुर अथवा गीत सुनाये जायें तो जातक विशेष जल्दी ही स्वस्थ हो जाता है !
यहां जिन शास्त्रीय रागों का उल्लेख किया किया गया है उन रागो में कोई भी गीत, संगीत, भजन या वाद्य यंत्र बजा कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है !
इसी तारतम्य में उनसे संबन्धित गीत के उदाहरण भी दिया गया है।

हृदय रोग –
इस रोग मे राग दरबारी व राग सारंग से संबन्धित संगीत सुनना लाभदायक है।
इनसे संबन्धित कुछ फिल्मी गीत निम्न हैं-
तोरा मन दर्पण कहलाए,
राधिके तूने बंसरी चुराई,
झनक झनक तोरी बाजे पायलिया,
ओ दुनिया के रखवाले (बैजू बावरा),

अनिद्रा –
यह रोग हमारे जीवन में होने वाले सबसे साधारण रोगों में से एक है। इस रोग के होने पर राग भैरवी व राग सोहनी सुनना लाभकारी होता है, जिनके प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं।
रात भर उनकी याद आती रही,
नाचे मन मोरा,
मीठे बोल बोले बोले पायलिया
तू गंगा की मौज मैं यमुना,

एसिडिटी –
इस रोग के होने पर राग खमाज सुनने से लाभ मिलता है. इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से है।
आयो कहाँ से घनश्याम,
छूकर मेरे मन को,
कैसे बीते दिन कैसे बीती रतिया,
रहते थे कभी जिनके दिल में,

कमजोरी –
यह रोग शारीरिक शक्तिहीनता से संबन्धित है!
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति कुछ भी काम कर पाने में खुद को असमर्थ महसूस करता है।
इस रोग के होने पर राग जय जयवंती सुनना या गाना लाभदायक होता है।
इस राग के प्रमुख गीत निम्न हैं मनमोहना बड़े झूठे,
बैरन नींद ना आए,
मोहब्बत की राहों मे चलना संभल संभल के,
साज हो तुम आवाज़ हूँ मैं,

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याददाश्त –
जिन लोगों की याददाश्त कम हो या कम हो रही हो, उन्हे राग शिवरंजनी सुनने से बहुत लाभ मिलता है !
इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं,
ना किसी की आँख का नूर हूँ,
मेरे नैना,
दिल के झरोखे में तुझको,
जाने कहाँ गए वो दिन।

खून की कमी –
इस रोग से पीड़ित होने पर व्यक्ति का चेहरा निस्तेज व सूखा सा रहता है. स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन होता है। ऐसे में राग पीलू से संबन्धित गीत सुनने से लाभ पाया जा सकता हैं !
आज सोचा तो आँसू भर आए,
नदिया किनारे ,
खाली हाथ शाम आई है,
तेरे बिन सूने नयन हमारे।

मनोरोग अथवा डिप्रेसन –
इस रोग में राग बिहाग व राग मधुवंती सुनना लाभदायक होता है। इन रागों के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं!
तुझे देने को मेरे पास कुछ नहीं,
तेरे प्यार में दिलदार,
पिया बावरी,
दिल जो ना कह सका,
मेरे सुर और तेरे गीत।

रक्तचाप-
ऊंचे रक्तचाप मे धीमी गति और निम्न रक्तचाप मे तीव्र गति का गीत संगीत लाभ देता है.
शास्त्रीय रागों मे राग भूपाली को विलंबित व तीव्र गति से सुना या गाया जा सकता है:!
ऊंचे रक्तचाप में…
चल उडजा रे पंछी कि अब ये देश,
ज्योति कलश छलके,
चलो दिलदार चलो,
नीले गगन के तले।

निम्न रक्तचाप में..
ओ नींद ना मुझको आए,
जहां डाल डाल पर। ,

अस्थमा –
इस रोग में आस्था–भक्ति पर आधारित गीत संगीत सुनने व गाने से लाभ होता है।
राग मालकोस व राग ललित से संबन्धित गीत इस रोग मे सुने जा सकते हैं !
जिनमें प्रमुख गीत निम्न हैं..
तू छुपी हैं कहाँ,
तू है मेरा प्रेम देवता ,
मन तड़पत हरी दर्शन को आज,
आधा है चंद्रमा।

सिरदर्द –
इस रोग के होने पर राग भैरव सुनना लाभदायक होता है !
इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं..
मोहे भूल गए सावरियाँ,
पूंछों ना कैसे मैंने रैन बिताई।

शास्त्रीय संगीत के आधार पर।