ठंड में सांस की तकलीफ क्यों बढ़ती है ?
ठंड में सांस की तकलीफ क्यों बढ़ती है ?

*ठंड में सांस की तकलीफ क्यों बढ़ती है ?*
_*जानिए कारण, आहार और जरूरी सावधानिया*_
सही खान-पान, स्वच्छता, संतुलित दिनचर्या और थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर ठंड के मौसम में भी सांस की तकलीफ से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। सर्दी का मौसम तभी आनंददायक बनता है, जब हम अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें। सर्दियों का मौसम अपने साथ ठंडी हवा, कोहरा और प्रदूषण लेकर आता है। इस समय बहुत से लोगों को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, खांसी, घरघराहट और जल्दी थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह परेशानी विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा, एलर्जी, हृदय रोग या पहले से श्वसन संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों में अधिक देखी जाती है। ठंड के मौसम में सांस की तकलीफ बढ़ने के पीछे कई कारण होते हैं, जिन्हें समझना और समय रहते सही उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।
ठंड के दिनों में जब हम ठंडी और सूखी हवा में सांस लेते हैं, तो फेफड़ों की नलियाँ सिकुड़ जाती हैं। इससे हवा का प्रवाह बाधित होता है और सांस फूलने लगती है। यही कारण है कि अस्थमा के मरीजों को सर्दियों में ज्यादा दिक्कत होती है। इसके साथ ही कोहरा और वायु प्रदूषण हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ा देते हैं, जो सांस के रास्ते फेफड़ों में जाकर सूजन पैदा करते हैं। यह सूजन खांसी, बलगम और सांस लेने में परेशानी को और बढ़ा देती है। सर्दियों में धूप कम निकलने के कारण शरीर में विटामिन D की कमी हो सकती है। विटामिन ना केवल हड्डियों बल्कि इम्युनिटी के लिए भी जरूरी होता है। इसकी कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और सर्दी-जुकाम, संक्रमण तथा श्वसन रोग जल्दी पकड़ लेते हैं। इसके अलावा ठंड में प्यास कम लगती है, जिससे लोग पानी कम पीते हैं। इससे बलगम गाढ़ा हो जाता है और सांस की नलियों में जमकर परेशानी पैदा करता है। घर के अंदर बंद कमरों में हीटर, अंगीठी या अन्य ईंधन जलाने से निकलने वाला धुआँ भी सांस की समस्या को बढ़ा सकता है। पर्याप्त हवा का आवागमन न होने पर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे घुटन और सांस फूलने का एहसास होने लगता है। इसलिए ठंड के मौसम में केवल बाहर की हवा ही नहीं, बल्कि घर के अंदर की हवा का भी ध्यान रखना जरूरी है।
*सांस की सेहत के लिए सही आहार*
सर्दियों में ऐसा आहार लेना चाहिए जो शरीर को गर्म रखे, इम्युनिटी बढ़ाए और फेफड़ों को मजबूत बनाए। अदरक, लहसुन, हल्दी, काली मिर्च जैसे मसाले सूजन को कम करने और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। हल्दी वाला गुनगुना दूध सर्दी-खांसी और सांस की समस्या में काफी लाभकारी माना जाता है।
विटामिन-C से भरपूर फल जैसे आंवला, संतरा, अमरूद और नींबू फेफड़ों को संक्रमण से बचाने में सहायक होते हैं। मौसमी सब्जियाँ जैसे गाजर, पालक, मेथी, चुकंदर और शलजम शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं। बादाम, अखरोट और मूंगफली जैसे मेवे ओमेगा-फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो फेफड़ों की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। गुनगुना पानी, सूप और हर्बल काढ़ा पीना सर्दियों में बहुत लाभकारी होता है। इससे बलगम पतला होता है और बाहर निकलना आसान हो जाता है। तुलसी, अदरक और दालचीनी से बना काढ़ा गले और फेफड़ों को राहत देता है। वहीं बहुत ठंडी चीजें, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम और अत्यधिक तली-भुनी चीजों से बचना चाहिए, क्योंकि ये बलगम बढ़ाकर सांस की परेशानी को बढ़ा सकती हैं।
*जरूरी सावधानियाँ जो अपनाना चाहिए*
ठंडी हवा में बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकना चाहिए ताकि ठंडी हवा सीधे फेफड़ों में न जाए। सुबह बहुत जल्दी, खासकर कोहरे और प्रदूषण के समय बाहर टहलने से बचें। बेहतर है कि धूप निकलने के बाद ही बाहर जाएँ। घर में धूप आने दें और कमरों में हवा के आवागमन का ध्यान रखें। धूम्रपान और धुएँ के संपर्क से पूरी तरह बचना चाहिए। यदि हीटर या अंगीठी का उपयोग किया जा रहा है, तो कमरे में वेंटिलेशन जरूर रखें। रोजाना हल्की शारीरिक गतिविधि जैसे टहलना, स्ट्रेचिंग और गहरी सांस लेने के अभ्यास फेफड़ों की क्षमता को बेहतर बनाते हैं। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम भी सांस की समस्या में सहायक हो सकते हैं।
पर्याप्त नींद लेना, तनाव कम रखना और नियमित दिनचर्या बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। हाथों की सफाई रखें, भीड़भाड़ से बचें और सर्दी-खांसी से पीड़ित लोगों से उचित दूरी बनाए रखें ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
यदि किसी व्यक्ति को लगातार सांस फूलना, सीने में दर्द, होंठों का नीला पड़ना, तेज बुखार या अत्यधिक खांसी की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। स्वयं दवा लेने से बचें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।
सही खान-पान, स्वच्छता, संतुलित दिनचर्या और थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर ठंड के मौसम में भी सांस की तकलीफ से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। सर्दी का मौसम तभी आनंददायक बनता है, जब हम अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें।
डिस्क्लेमर यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, लक्षण या बीमारी के लिए कृपया पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श ले । आहार एवं पोषण से संबंधित व्यक्तिगत सलाह के लिए योग्य एवं पंजीकृत डाइटीशियन / न्यूट्रिशनिस्ट से ही संपर्क करें। लेख में दी गई जानकारी को स्वयं उपचार के रूप में न अपनाएँ।
*सीनियर आहार एवं पोषण विशेषज्ञ*
*डाइटीशियन वर्णिता गर्ग*
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