गजब हाल! गाजियाबाद निगम ने 50 लाख में लगवाया गोबर पेंट प्लांट, खुद करा रहे जापानी कंपनी के पेंट से पुताई

गजब हाल! गाजियाबाद निगम ने 50 लाख में लगवाया गोबर पेंट प्लांट, खुद करा रहे जापानी कंपनी के पेंट से पुताई

गजब हाल! गाजियाबाद निगम ने 50 लाख में लगवाया गोबर पेंट प्लांट, खुद करा रहे जापानी कंपनी के पेंट से पुताई गाजियाबाद। नगर निगम ने 50 लाख रुपये की लागत से जिस गोवंशी गोबर पेंट प्लांट को बनवाया उसका खुद ही बंटाधार करने में लगा है। गोबर पेंट का एक काला सच सामने आया है। निगम गोबर पेंट प्लांट में बने पेंट का खुद ही प्रयोग नहीं कर रहा है।ऐसे में आम लोगों से पेंट खरीदने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। जबकि निगम ने इस निर्माण के साथ ही इसके प्रचार प्रसार पर पैसा बहाया था। निगम मुख्यालय की बिल्डिंग बेसमेंट की पुताई में निजी कंपनी के पेंट का प्रयोग किया जा रहा है। अभी तक एक बार भी निगम की ओर से प्लांट से पेंट नहीं लिया गया है।

सितंबर में शुरू हुआ था प्लांट

नगर निगम ने खादी इंडिया के तहत नंदी पार्क गोशाला परिसर में 50 लाख रुपये की कीमत से गोबर पेंट का प्लांट लगवाया था। यह प्लांट सितंबर में शुरू हुआ था। प्लांट को सफल बनाने के लिए शहर में जगह-जगह यूनिपोल पर विज्ञापन लगाए गए थे। आम लोगों को इस पेंट को खरीदने के लिए प्रेरित किया था।

 

नगर निगम स्थित गोबर पेंट प्लांट। जागरण

संजय नगर में स्वदेशी मेले इस पेंट स्टाल लगाकर भी प्रचार किया गया। अब निगम खुद अपनी बिल्डिंग में इस पेंट का प्रयोग नहीं कर रहा है। निगम की बिल्डिंग के बेसमेंट में पुताई का काम चल रहा है। मंगलवार को दैनिक जागरण की टीम वहां पहुंची तो यहां तीन कंपनी के पेंट का प्रयोग हो रहा था।

इनमें एक पेंट की कंपनी कंसाई नेरोलैक पेंट्स लिमिटेड जापानी मूल की है। अन्य दो भारतीय पेंट कंपनियों का प्रयोग किया जा रहा था। सवाल ये है कि जब निगम खुद ही गोबर पेंट का प्रयोग नहीं कर रहा है तो दूसरों को किस हक से कह रहा है। पिछले चार माह में महज 6600 रुपये का गोबर पेंट बिका है। यह पेंट भी एक ठेकेदार ने स्कूल में प्रयोग करने के लिए खरीदा था।

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एक भी महिला काम करती नहीं मिली

नगर निगम ने दावा किया था कि प्लांट में काम करने के लिए महिलाओं को रोजगार दिया जाएगा। सोमवार को दैनिक जागरण की टीम प्लांट पहुंची तो यहां एक भी महिला काम करती नहीं मिली। सोमवार को प्लांट में कुछ पेंट बना रखा था।

यहां पेंट प्लांट संचालक सीता राम शर्मा और मैनेजर अभिषेक त्रिपाठी मिले। उन्होंने बताया कि पिछले चार माह में 20 से 25 लीटर पेंट ही बिका है। निगम की ओर से अभी तक उनसे पेंट नहीं लिया गया है। वहीं नगर निगम की ओर कहा गया कि नगर निगम कामों में इस पेंट का प्रयोग करने की प्लानिंग की जा रही है।

मंशा पर सवाल

गोबर पेंट की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर है। जबकि निजी कंपनी के पेंट की कीमत 300 से 500 रुपये प्रति लीटर है। ऐसे में सवाल है कि जब गोबर पेंट सस्ता और मजबूत होने के बाद उसका प्रयोग क्यों नहीं किया जा रहा है। निगम मुख्यालय के बेसमेंट में काम की देखरेख कर रहे व्यक्ति ने बताया कि उन्हें ठेकेदार ने जिस पेंट से पुताई करने के लिए कहा है वह उसी का प्रयोग कर रहे हैं।

उन्होंने निगम मुख्यालय बिल्डिंग के कई अन्य कमरों में निजी कंपनी के पेंट से पुताई की है। प्लांट संचालक सीता राम शर्मा ने भी मंगलवार को नगर निगम के मुख्यालय पहुंचकर गोबर पेंट का प्रयोग नहीं करने पर आपत्ति जताई।

निगम द्वारा बताई गई गोबर पेंट की खासियत

सामान्य पेंट से अधिक टिकाऊ होता है
छत पर करने से कमरे को ठंडा रखता है
सामान्य पेंट से देखने में बेहतर लगता है।
यह पेंट ईको फ्रेंडली है
यह एंटी बैक्टीरिया पेंट है
डिस्टेंपर में 30 प्रतिशत गोबर में मिलाकर पेंट बनाया जा रहा
इमल्शन में 20 प्रतिशत गोबर में मिलाकर दूसरा पेंट बनाया जाता
2000 लीटर पेंट 24 घंटे में बनाने बनाने की प्लांट की क्षमता है