डा. मोहन भागवत 21 फरवरी को मेरठ में देंगे दस्तक

डा. मोहन भागवत 21 फरवरी को मेरठ में देंगे दस्तक

डा. मोहन भागवत 21 फरवरी को मेरठ में देंगे दस्तक:

संघ इससे पहले समाज के इतना करीब कभी नहीं रहा, उर्जित हो रहा है राष्ट्र

डा. मोहन भागवत 21 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजधानी माने-जाने वाले मेरठ में माधव कुंज शताब्दी नगर में आयोजित जन गोष्ठी में प्रबंद्धजनों के दिल और मन पर अपनी दस्तक देने का काम करेंगे

✍🏾लेखक : सुरेंद्र सिंघल, राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार.

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1925 में विजयदशमी के दिन 27 सितंबर को महाराष्ट्र के अप्रतिम देशभक्त और दूरदृष्टता डा. केशव बलिराम हेडगेवार ने जिस सामाजिक और स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नागपुर महाराष्ट्र में स्थापना की थी वह सौ वर्षों की लंबी यात्रा अब पूरी तरह से विकसित हो गया है जो समाज को अपनी सेवाओं और ओजस्वी प्रेरणा से नए रूप में उर्जित कर रहा है। यह भारत राष्ट्र और समाज की धुरी बन गया है। शायद इसी उद्देश्य पूर्ति की कामना संघ संस्थापक डा. हेडगेवार ने की होगी। संघ को इस स्थिति में खडा करने में इसके सर संचालकों डा. हेडकेवार, माधव सदाशिव राव गोलवलकर, मधुकर दत्तात्रेत्रय देवरस, प्रोफेसर राजेंद्र सिंह, कुप हल्ली सीता रमैया सुदर्शन और डा. मोहन भागवत की भूमिका रही है। इसका शताब्दी वर्ष मनाने का सौभाग्य और शुभ अवसर वर्तमान एवं छठे सर संचालक परम पूजनीय डा. भागवत को मिला है। जो पिछले एक वर्ष से देशभर में घूम-घूमकर लोगों के बीच जाकर संघ के भविष्य के दृष्टिकोण से सफलतापूर्वक रखने का काम कर रहे है।
शताब्दी समारोह के आयोजनों में डा. मोहन भागवत के विचारों को सुनने, जानने और संघ को नजदीक से देखने का जो अवसर देशवासियों को मिल रहा है वह अपनेआप में दुलर्भ तो है ही साथ ही उन्हें संघ की भूमिका और महत्व दोनो का ठीक से अहसास हो रहा है। संघ भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे विशाल और सुगठित सामाजिक संगठन है, जो पूरी तरह से आत्म निर्भर है। जिसके पास करोडों हिंदुओं की ताकत है। जो स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र बनाने में सतत अपना योगदान दे रही है। भारत में वर्ष 2014 से संघ के विचारों पर आधारित और उसके निचले कार्यकर्ताओं की प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा सरकार सत्तारूढ है और अनेक राज्यों में सरकारें है। इनसे किसी भी रूप में भारत का संवैधानिक ढांचा, तंत्र एवं लोकतंत्र और समाज का कोई अनिष्ट नहीं हुआ है। देश तेजगति से विकसित राष्ट्र की ओर बढ रहा है। देश की एकता, अखंडता और मजबूत हुई है। सामाजिक सद्भाव बढा है। राष्ट्र की नैतिकता और लोगों की व्यक्तिगत स्वंत्रता और अभिव्यक्ति पूरी तरह से अक्षुण बनी हुई है। भारत विविधताओं से भरा हिंदू राष्ट्र है। इस पर देशवासी गर्व करते है। हमने भारत को स्वतंत्रता दिलवाने वाले अपने महान स्वतंत्रता सेनानियों और लोकतंत्र और गणतंत्र की संरचना करने वालों और विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान देने वाले कभी भी न तो गलत साबित किया और न हीं नीचा दिखाने का काम किया। इसके उलट पाकिस्तान में उसके निर्माता मोहम्मद अली जिन्ना के सपनोें को चकनाचूर और धूलदूरिस किया। यही हाल बांग्लादेश के निर्माता शेख मुजीर्बुरहमान का हुआ। जहां वह अपने अस्तित्व की अंतिम सांसे गिन रहा है।
भारत का लक्ष्य 2047 में विकसित राष्ट्र बनने का है तो संघ उसे अखंड भारत के रूप में विकसित होना देखना चाहता है।
डा. मोहन भागवत 21 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजधानी माने-जाने वाले मेरठ में माधव कुंज शताब्दी नगर में आयोजित जन गोष्ठी में प्रबंद्धजनों के दिल और मन पर अपनी दस्तक देने का काम करेंगे। संघ प्रमुख ने संघ के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 26 अगस्त 2025 को तीन दिवसीय व्याख्यान माला की शुरूआत की थी। तब से डा. भागवत देशभर में अपनी अलख जगा चुके है। लाखों देशवासियों ने उनको करीब से देखा और सुना। इनमें बहुसंख्यक लोग वो थे जो संघ के कभी करीब नहीं रहे। मोहन भागवत ने इस दौरान हजारों कठिन सवालों का स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने बता दिया कि संघ एक खुली किताब और उसकी कार्य प्रणाली और उसके कार्यकर्ताओं का जीवन गंगाजल की तरह निर्मल और पारदर्शी है। संघ किसी का भी विरोधी नहीं है। वह भाजपा और उसकी सरकार को उचित सहयोग और मार्गदर्शन तो देता है लेकिन रिमोट कंट्रोल से उसका संचालन कतई नहीं करता। संघ के विचारों से ओत-प्रोत केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों के कामकाज का आंकलन जब हम करते है तो देखते है कि पूर्ववर्ती कांग्रेसी सरकारों की तुलना में देश में हिंसा, दंगे फसाद और सद्भावना बिगाडने वाली घटनाएं नगण्य है। यानि देश का सामाजिक सद्भाव और उन्नत तरीके से कायम रहा और जातीय एवं मजहबी समूहों के बीच परस्पर शांति और सहयोग की भावना और मजबूत हुई। इससे संघ विरोधियों द्वारा उसके बारे में वर्षों वर्ष पैदा की गई तमाम शंकाएं, आशंकाए निर्मूल साबित हुई। संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत का नेतृत्व और व्यक्तित्व भारत और उसके समाज की मूल प्रवृत्तियों की तरह उदार और समन्वयवादी एवं पूरी तरह प्रगतिशील और आधुनिक विचारों से ओत-प्रोत है। यह बात उनके आयोजनों और उनके विचारों से साफ दिखाई दी। संघ में अपने होने को पूरीे तरह से देश के लिए सार्थक साबित हुआ है। देशवासी खासकर नई पीढी प्रेरित और उर्जित एवं आशावादी है। यह संघ की सौ वर्षों की यात्रा की बडी उपलब्धि है। महत्वपूर्ण है कि संघ प्रमुख देश के सभी वर्गों को लक्षित कर अपनी बात कहते है और मौजूदा देश और दुनिया की समस्याओं पर उनका सटीक नजरिया है। जो हर दृष्टि से देशवासियों को आशान्वित और संतुष्ट करता है।