शाबाश गोविंद ! कंधा टूटने पर भी नहीं टूटा हौसला… असहनीय दर्द सहकर मेरठ के अस्पताल से बागपत देने आया बोर्ड परीक्षा

शाबाश गोविंद ! कंधा टूटने पर भी नहीं टूटा हौसला... असहनीय दर्द सहकर मेरठ के अस्पताल से बागपत देने आया बोर्ड परीक्षा

शाबाश गोविंद ! कंधा टूटने पर भी नहीं टूटा हौसला… असहनीय दर्द सहकर मेरठ के अस्पताल से बागपत देने आया बोर्ड परीक्षा बागपत। यूपी बोर्ड की परीक्षा में भावुक एवं प्रेरणादायक दृश्य सामने आया जिसे देखकर हर किसी के मुंह से यही निकला कि शाबाश गोविंद!…तुम्हारे जज्बे को सलाम। 16 वर्षीय गोविंद कंधा एवं हसली टूटने व हाथ-पैरों पर गंभीर चोट के बावजूद मेरठ अस्पताल से परीक्षा देने बागपत आया।असहनीय दर्द में न केवल परीक्षा दी, बल्कि 50 किमी आवाजाही का अतिरिक्त संघर्ष कर पहाड़ जैसी मुसीबत को हराकर साल खराब होने से बचाया।

डौला गांव निवासी गोपीचंद का 16 वर्षीय बेटा गोविंद आदर्श इंटर कालेज डौला का हाईस्कूल का छात्र है। 15 फरवरी को वह साइकिल चलाकर खेत से घर लौट रहा था। तब गांव के समीप हिसावदा रोड पर गन्ना से लदे ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आया, जिससे बाएं कंधे और हसली की हड्डी टूट गई। हाथ-पैर तथा शरीर के अन्य भाग में खरोंच आई। वह बेहोश हो गया, लेकिन जब आंख खुली तो खुद को मेरठ के एक अस्पताल में पाया।

स्वजन ने किया मना, पर गोविंद नहीं माना

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प्लास्टर एवं पट्टी होने तथा दवाइयां लेने के बाद जब अगले दिन थोड़ा सामान्य हुआ तो स्वजन से घर से किताबें लाने की मांग करने लगा। पिता गोविंद व मां पूजा व चाचा ब्रजमोहन ने समझाया कि भगवान ने जान बचा दी…यह क्या कम है। ठीक होने के बाद पढ़ाई कर लेना। साल खराब होगा होने दो…अगले साल परीक्षा देना। तुम बैठ तो सकते नहीं और ऐसे में परीक्षा देने की पड़ी है। मगर वह कहां मानने वाला था और 18 फरवरी को परीक्षा के पहले दिन परीक्षा देने की जिद पर अड़ गया। उसकी जिद के आगे स्वजन को हार माननी पड़ी।

डीआईओएस ने की मदद

पिता किराए की कार से उसे लेकर शीलचंद इंटर कालेज परीक्षा केंद्र पहुंचे तो वहां जवाब मिला कि हमारी मजबूरी है… श्रुति लेखक डीआइओएस नियुक्त करते हैं। पिता कार में लिटाकर उसे 25 किमी दूर डीआइओएस कार्यालय बागपत पहुंचे। तब सुबह के आठ बज चुके थे। डीआइओएस राघवेंद्र सिंह तथा कंट्रोल रूम में ड्यूटी कर रहीं शिक्षिकाओं तथा सचल दलों के सदस्यों का पता चला तो हर कोई उनकी कार की ओर दौड़ा तथा उन्हें देख भावुक हुए बिना नहीं रहा।

श्रुति लेखक उपलब्ध कराया

डीआइओएस ने श्रुति लेखक नियुक्त करने में पलभर की देरी नहीं लगाई। फिर वापस 25 किमी दूर अमीनगर सराय पहुंचे और गोविंद ने परीक्षा केंद्र के अंदर कार की पिछली सीट पर लेटकर बोला और कक्षा 7वीं पास नियुक्त श्रुति लेखक बोबी कापी पर लिखता गया। गोविंद ने जागरण से कहा कि एक साल का समय कितना कीमती होता है इसका अंदाजा नहीं लगा सकते, इसलिए अपना साल खराब करना नहीं चाहता।