त्रिसुक्त पाठ के समापन पर साधु संतो ने दी पूर्ण आहुति

त्रिसुक्त पाठ के समापन पर साधु संतो ने दी पूर्ण आहुति

त्रिसुक्त पाठ के समापन पर साधु संतो ने दी पूर्ण आहुति

मोरना :–शुकतीर्थ मे स्थित महाशक्ति सिद्धपीठ आश्रम मे जारी त्रिसुक्त पाठ का रविवार को समापन हो गया। इस अवसर पर हवन यज्ञ मे पूर्णआहुति दी गयी व विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

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वैदिक सुक्त अनुष्ठान के अवसर पर स्वामी विज्ञानंद महाराज ने कहा की वेद के सूक्त वेद की मंत्रराशि से परिपूर्ण होते हैं । इनका विधि पूर्वक अनुष्ठान और शुद्ध उच्चारण के साथ यह वांछित फल देने मे सुलभ है।वेद मंत्रोच्चार एवं अनुष्ठान के लिए श्रीमदभागवत गीता मे सेंकड़ो प्रकार के विधान लिखित हैं।विधि से युक्त अनुष्ठान की पूर्णता पर अन्नदान की व्यवस्था हो, ठीक प्रकार से मंत्रो का उच्चारण हो, साथ ही दक्षिणा का विधान हो।यह सब तभी फलीभूत होते हैं।जब श्रद्धा के साथ इनको परिपूर्ण किया जाये।
साध्वी योग नंदनी ने कहा की शुद्धता,पवित्रता,शान्ति के लिए श्रीसुक्त,पुरुसुक्त,लक्ष्मीसुक्त यज्ञ अनुष्ठान को विधि विधान से आश्रम मे सम्पन्न कराया गया है।चन्द्रमा ब्रह्मचारी ने कहा की जगत कल्याण के लिए संत अपना जीवन का समर्पण करते हैं। सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन अमूल्य धरोहर है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से रमणगिरी महाराज, गीतानंद गिरी महाराज श्रवण दास महाराज,भरत दास, सच्चिदानंद महाराज,रामसेवक महाराज,अजय कृष्ण शास्त्री, जयदेव महाराज,बसंत दास, जयवीर दास महाराज,कुलदीप, युवराज,रॉबिन पाल, बीके प्रियांशी दीदी,बीके श्रवण भाई आदि उपस्थित रहे।