मेरठ : हिंदुओं की संगठित ताकत ही भारत को आंतरिक और बाह्य खतरों से बचा सकती है : सरसंघ चालक डा. मोहन भागवत
मेरठ : हिंदुओं की संगठित ताकत ही भारत को आंतरिक और बाह्य खतरों से बचा सकती है : सरसंघ चालक डा. मोहन भागवत

मेरठ : हिंदुओं की संगठित ताकत ही भारत को आंतरिक और बाह्य खतरों से बचा सकती है : सरसंघ चालक डा. मोहन भागवत
डा. मोहन भागवत ने मेरठ में संघ के मेरठ और ब्रज प्रांत के चुनिंदा 1500 प्रमुख बुद्धिजीवियों और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विशिष्टजनों की गोष्ठी को संबोधित किया
✍🏾सुरेंद्र सिंघल,वरिष्ठ पत्रकार.
मेरठ। देश के हिंदू पुरोधा और विश्व के सबसे बड़े हिंदू स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 6 वें सरसंघ चालक पूजनीय डा. मोहनराव भागवत ने आज इस बात पर बल दिया कि हिंदुओं की संगठित ताकत ही भारतीय राष्ट्र और समाज को उसके समक्ष घातक चुनौतियों से बचा सकती है। इसलिए हिंदुओं की एकता और संगठन भारत के लिए अनिवार्य है।
डा. भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर चुका है और अनेक झंझावातों से गुजरते हुए आज वह इस मुकाम पर पहुंचा है जिसके प्रति हर ओर से हिंदुओं का आकर्षण, समर्थन और सहयोग बढ़ रहा है। डा. मोहन भागवत मेरठ में अपने दो दिन के प्रवास के दूसरे दिन आज शताब्दी नगर स्थित माधवकुंज में संघ के मेरठ और ब्रज प्रांत के चुनिंदा 1500 प्रमुख बुद्धिजीवियों और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विशिष्टजनों की गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रगतिशील किसान पद्मश्री भारत भूषण त्यागी और संचालन क्षेत्रीय कार्यवाह डा. प्रमोद शर्मा ने किया। डा.भागवत ने पद्मश्री भारत भूषण त्यागी और आचार्या डा. सुमेधा को शाल ओढ़ाकर एवं पौधा भेंटकर अभिनंदन किया। डा. मोहन भागवत के साथ मंच पर क्षेत्रीय संघ चालक सूर्यप्रकाश टांक और चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ के पूर्व कुलपति डा. नरेंद्र तनेजा सहसंघ चालक मौजूद रहे। डा. मोहन भागवत को सुनने वाले विशिष्ठ श्रोताओं में वरिष्ठ संघ प्रचारक अशोक कुमार बेरी, मेरठ प्रांत के क्षेत्रीय प्रचारक महेंद्र शर्मा, प्रांत प्रचारक चौधरी अनिल सिंह, लेखक एवं देवबंद-सहारनपुर के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल, वरिष्ठ पत्रकार अशोक गुप्ता, दून वैली पब्लिक स्कूल के चेयरमैन अनुराग सिंघल समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख शख्सियत उपस्थित थीं। संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत ने अपने 35 मिनट के ओजस्वी सारगर्भित भाषण में हिंदू समाज के अग्रणी लोगों का आह्वान किया कि वे अपने बीच हिंदू समाज के लोगों को संघ के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और उसकी महती भूमिका से अवगत कराएं। डा. भागवत ने कहा कि भारत की आबादी 142 करोड़ है जिसमें 100 करोड़ लोग वो हैं जो खुद को हिंदू कहते हैं बाकी 42 करोड़ लोग भी खान-पान, वेशभूषा, संस्कृति, रस्मो-रिवाज, भाषा, रहन-सहन और ऐतिहासिक विरासत और अपने पूर्वजों के नाते हिंदू ही हैं। पूजा पद्धति उनकी जरूर भिन्न है लेकिन वे सब हिंदू की परिधि में ही समाहित हैं। उन्होंने कहा कि सभी धर्मावलंबियों को अपने-अपने धर्म के मुताबिक आचरण करने, पूजा पद्धति को अपनाने की पूरी स्वतंत्रता और अधिकार है जिसे सभी धर्मावलंबियों को मानने और सम्मान देने में कोई गुरेज नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द संज्ञा नहीं विशेषण है और यह हमें हजारों साल पहले दूसरे लोगों ने दिया था। यह भारत पर विदेशी हमलों के वक्त हमारे महान संत गुरूनानक देव ने हमें हिंदुस्तान नाम से संबोधित कर विभूषित किया था। हमारे धर्मग्रंथों में भी हिंदुस्तान नाम का खूब उल्लेख मिलता है।
उन्होंने देशवासियों खासकर हिंदू समाज को चेताया कि विश्व में ऐसी शक्तियां हैं जो भारत की एकता, अखंड़ता और समाज के बिखराव की मंशा पाले हुए हैं जिनसे हमें सचेत रहना है। ऐसी ही अंदरूनी ताकते हैं जो भीतर से हमारे समक्ष प्रबल चुनौतियां पेश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हम आज 100 साल में एक विराट हिंदू संगठन के रूप में विकसित हुए हैं। देश को और हिंदुओं को एकजुट रखना ही हमारा अंतिम लक्ष्य है। इसके अलावा हमारा कोई निहितार्थ नहीं है। हम अब भी पूरी सामथर्य के साथ हिंदू संगठन के कार्य को करते जाएंगे। इसमें उन्होंने सभी क्षेत्रों में जागरूक हिंदू शख्सियतों से सहयोग की अपेक्षा की। डा. मोहन भागवत ने सभागार में उपस्थित अनेक लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए।

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