मोदी-योगी के मेरठ आगाज से मिशन- 2027 को मिलेगा बल

मोदी-योगी के मेरठ आगाज से मिशन- 2027 को मिलेगा बल

मोदी-योगी के मेरठ आगाज से मिशन- 2027 को मिलेगा बल

✍🏾 लेखक- सुरेंद्र सिंघल, राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार.

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजधानी माने जाने वाले और 1857 की क्रांति का बिगुल फूंकने के लिए स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज मेरठ की दो तारीखें 21 और 22 फरवरी भाजपा के यूपी मिशन-2027 के लिए मुफिद साबित हो सकती हैं। यह इसलिए भी जरूरी है कि लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी ने भाजपा को 33 सीटों पर सीमित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के श्रेय से वंचित कर दिया था। राजनीतिक जानकारों का निष्कर्ष था कि कहीं न कहीं योगी का पराक्रम और वैभव छीज रहा है। अकेले उनके बूते यूपी को साधने की मंशा रखना बड़ी रणनीतिक चूक होगी। भारत के हिंदुओं के सबसे बड़े पुरोधा संघ प्रमुख सरसंघ चालक डा. मोहन भागवत ने 20 और 21 फरवरी को खिलाड़ियों और बुद्धिजीवियों को संबोधित करते हुए अपनी मंशा दोटूक शब्दों में जाहिर कर दी थी। उनका पूरा जोर इस बात पर था कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने और इसकी अस्मिता को बनाए रखने के लिए 100 करोड़ हिंदुओं की एकजुटता अनिवार्य है। उन्होंने अपने इस मंत्र के जरिए संघ और उसके समर्थकों का एजेंडा भी तय कर दिया। 21 फरवरी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और डा. भागवत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंक्ति में शामिल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मेरठ में थे। लेकिन 22 फरवरी रविवार का दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए था। जिन्होंने यूपी मिशन-27 को ध्यान में रखते हुए पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अपने ओजस्वी भाषण के जरिए साधने का काम बखूबी किया। उन्होंने पश्चिम के हर वर्ग को एड्रेस किया। उन्होंने बता दिया कि क्यों देश में और उत्तर प्रदेश में भाजपा शासन अनिवार्य है। मौका था दिल्ली-मेरठ नमो भारत के संपूर्ण कोरिडोर का राष्ट्र को समर्पण और मेरठ मेट्रो के 21 किलोमीटर का उद्घाटन करना। मोदी के भाषण के विश्लेषण से पता चलता है कि उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भाजपा की कमजोरियों का ठीक से अहसास है। तभी उन्होंने मेरठ को याद दिलाया कि 2014 की लोकसभा चुनाव से पूर्व अपने चुनाव अभियान की शुरूआत इसी मेरठ की पुण्य धरती से की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को विकास पुरूष से संबोधित करते हुए उनके नेतृत्व, कार्यकुशलता और प्रभावी शासन व्यवस्था की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर का इस्तेमाल कांग्रेस पर अपने अभी तक के सबसे तीखे प्रहारों के लिए भी किया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को नई दिल्ली के भरत मंडपम में आयोजित एआई सम्मेलन में विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस नेता अपने कपड़े उतारकर पहुंच गए थे इस पर मोदी ने कांग्रेस से पूछा कि देश जानता है कि आप पहले से नंगे हो। फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्यों पड़ी। कांग्रेस नेताओं ने दिखा दिया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी मानसिक रूप से दिवालिया हो गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मेरी कब्र खोदने और मेरी मां को गाली देने की कुत्सित हरकतें करती रहती हैं। उन्हें भाजपा और एनडीए से विरोध है तो समझ में बात आती है लेकिन एआई समिट में कांग्रेस के लोगों ने विदेशी अतिथियों के समक्ष सारी मार्यादाएं तार-तार कर दीं। यहां ध्यान देने की बात यह है कि लालू प्रसाद यादव के आरजेडी के सांसद मनोज झा, बसपा सुप्रीमो मायावती और लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सामने आकर कांग्रेस के अर्द्धनग्न प्रदर्शन की कड़े शब्दों में भतर्सना कर चुके हैं। कांग्रेस की इस हरकत ने उसे इंडी गठबंधन के अपने सहयोगी दलों के बीच भी अलग-थलग कर दिया है। मोदी को इस मुद्दे पर आरजेडी, बसपा और सपा जैसे प्रतिपक्षी दलों का समर्थन मिलने से एक बार फिर से गैर कांग्रेस का विरोध परिलक्षित होता है।
मेरठ से करोड़ो-अरबों की विकास योजनाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से नवाजे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम के लोग चौधरी साहब के ग्रामोत्थान और किसान चिंतन से भली भांति परिचित हैं। भाजपा की डबल इंजन सरकार उनके मिशन को ही आगे बढ़ा रही है। मोदी-योगी के साथ मंच पर चौधरी चरण सिंह के पौत्र और राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जयंत चौधरी अपने दोनों सुयोग्य सांसदों चंदन चौहान बिजनौर और डा, राजकुमार सांगवान बागपत मौजूद थे। मोदी-योगी का स्वागत करने को थाली में बनाए गए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने भी सभा को संबोधित किया। भाजपा में ब्राह्मण चेहरे के रूप में माने जाने वाले उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, मेरठ के राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी, राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर, राज्यमंत्री दिनेश खटीक, सांसद अरूण गोविल, एमएलसी अश्विनी त्यागी आदि की मौजूदगी भाजपा के जाटीय समीकरणों के सुदृणीकरण की ओर साफ इशारा कर रही थी।
मिशन-2027 भाजपा के लिए तब तक पूरा होना असंभव है जब वह अपने भीतर की कमजोरियों का चिंतन नहीं करती है। उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन में नए चेहरों को लाने और 70-80 फीसद तक नए उम्मीदवारों को चुनाव में उतारे जाने की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपने गृह राज्य गुजरात में ऐसा करके भारी सफलता अर्जित कर चुके हैं। उसी गुजराती के दांव की दरकार यूपी को भी है। 2017 से भाजपा की दरकार की नई शुरूआत को 2027 में एक दशक पूरा हो जाएगा। योगी सरकार अपना खुद का प्रभाव जरूर उत्तर प्रदेश पर स्थापित करने में सफल रही है। लेकिन उसका संगठन और उसके विधायक एवं मंत्रिगणों का कामकाज बेहद मायूसाना है। इससे पार पाए बगैर मोदी-योगी को मिशन-2027 को पार करना मुश्किल ही नहीं असंभव है। योगी चूके नहीं हैं। भाजपा ने पंकज चौधरी को कमान सौंपकर अक्लमंदी प्रदर्शित की है। मेरठ प्रांत के अध्यक्ष के चयन को भी नेतृत्व को गंभीरता से लेना होगा।