राष्ट्र का अस्तित्व धर्म, संस्कृति, सभ्यता,इतिहास पर टिका होता है

राष्ट्र का अस्तित्व धर्म, संस्कृति, सभ्यता,इतिहास पर टिका होता है

राष्ट्र का अस्तित्व धर्म, संस्कृति, सभ्यता,इतिहास पर टिका होता है —ओमानन्द

मोरना :—- भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम स्थित डोंगरे जी भागवत भवन में अखिल भारतीय ललिताम्बा शक्ति समिति शाखा मुजफ्फरनगर के भक्तों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया।

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पोथी पूजन कर उन्होंने व्यासपीठ पर कथाव्यास ललिताम्बा पीठ हरिद्वार के पीठाधीश्वर स्वामी जयराम देवाचार्य महाराज को सम्मानित किया। इससे पूर्व तीर्थनगरी में श्रद्धालुओं ने बैंड बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली।
श्री डोंगरे भागवत भवन में कथा शुभारम्भ में पधारे स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत समृद्ध भारतीय आध्यात्म संस्कृति की आत्मा एवं अमूल्य निधि है। भागवत ज्ञान परंपरा की अखण्ड अमृत धारा है, जो वेद, पुराण, शास्त्र, धर्म, संस्कृति, इतिहास सभी को एकसूत्र में गूँथने वाली अद्भुत आध्यात्मिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महागाथा है। भागवत भारत की चिरंतन चेतना है, जो मनुष्य को कर्तव्यबोध कराती है। इस चिरंतन नश्वर जीवन से संबद्ध सत्य का विश्लेषण एवं प्रभु भक्ति और परमार्थ ही भागवत का आभ्यांत्रिक मर्म है।
पीठाधीश्वर ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का अस्तित्व धर्म, संस्कृति, सभ्यता तथा उसके इतिहास पर टिका होता है और भागवत इनके संरक्षण और संवर्धन का मुख्य आधार है। धर्म एवं संस्कृति की धारा जनमानस में निरंतर प्रवाहित होती रहे, लोकहित की इसी कामना से वेदव्यास जी ने श्रीमद् भागवत की रचना की थी। धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में भारत पूरे विश्व में सबसे महान है, क्योंकि भारत के पास भागवत, रामायण, भगवद् गीता जैसे दिव्य ग्रंथ हैं। मानव सभ्यता और अध्यात्म के विकास में इन ग्रंथों का बहुत बड़ा योगदान है। भागवत एक संस्कृति है, एक सभ्यता है, एक साधना है तथा एक जीवन मूल्य है।
ललिताम्बा पीठ हरिद्वार के पीठाधीश्वर जयराम देवाचार्य महाराज ने कहा कि शुकतीर्थ की पुण्यभूमि मुक्तितीर्थ तथा मुक्ति धाम है, जहां श्रीमद् भागवत प्रगट हुई है, जिससे राजा परीक्षित को मुक्ति मिली।
यज्ञमान अशोक शर्मा, सुभाष शर्मा, विजेंद्र शर्मा, श्याम लाल शर्मा ने वेद मंत्रोच्चार के साथ संत और पुरोहितों का चरणवंदन किया। मुकेश शर्मा, सतीश शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, कन्हैया शर्मा, शाकुंबर प्रसाद, अनुज मुद्गल आदि मौजूद रहे।