देवबंद : भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए वसुधैव कुटुंबकम की भावना को प्रबल करना होगा : स्वामी यतिश्वरनंद

देवबंद : भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए वसुधैव कुटुंबकम की भावना को प्रबल करना होगा : स्वामी यतिश्वरनंद

देवबंद : भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए वसुधैव कुटुंबकम की भावना को प्रबल करना होगा : स्वामी यतिश्वरनंद

आजादी के आंदोलन में आर्य समाज का महत्वपूर्ण योगदान : स्वामी आदित्यवेश

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(गौरव सिंघल)
देवबंद (सहारनपुर)। आर्य उप प्रतिनिधि सभा देवबंद एवं जिला आर्य प्रतिनिधि सभा सहारनपुर के संयुक्त तत्वावधान में वैदिक धर्म जागृति सम्मेलन एवं शोभायात्रा का आयोजन देवबंद में ऋषि दयानन्द के 200 वें जन्म जयंती वर्ष,आर्य समाज स्थापना दिवस एवं स्वतंत्रता सेनानी, गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद के 170 वें जन्म दिवस के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में हरिद्वार से पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतिश्वरानंद ने कहा कि यदि भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करना है तो वसुधैव कुटुंबकम की भावना को समाज में सशक्त करना होगा। उन्होंने कहा कि देश की उन्नति और प्रगति का मार्ग सामाजिक सौहार्द, समरसता और नैतिक मूल्यों से होकर गुजरता है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों की ओर लौटो का आह्वान इसलिए किया था क्योंकि जब तक भारतवासी वेदों के आदर्शों पर जीवन जीते रहे, तब तक भारत विश्व का नेतृत्व करता रहा। उन्होंने बताया कि आर्य समाज द्वारा संचालित सप्तक्रांति संकल्प अभियान के माध्यम से जातिवाद, साम्प्रदायिकता, धार्मिक अंधविश्वास, नारी उत्पीड़न, नशाखोरी, भ्रष्टाचार और शोषण जैसी कुरीतियों से मुक्त समाज के निर्माण का सतत प्रयास किया जा रहा है। देश को मानसिक, शैक्षिक,आर्थिक गुलामी से मुक्त करने के लिए आवश्यक है कि हमें प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति, आयुर्वेद एवं स्वदेशी को प्राथमिकता देनी होगी। ऋषि दयानन्द सरस्वती ने 150 वर्ष पूर्व सत्यार्थ प्रकाश मे लिखते हुए कहा था कि देश में अनिवार्य, समान एवं नि:शुल्क शिक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्वभाषा एवं स्वराज्य के संकल्प को चरितार्थ करने पर बल दिया। सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय महासचिव ओर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वामी आदित्यवेश ने कहा कि आज़ादी के आंदोलन मे आर्य समाज एवं उसके कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक एवं महान स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद के 100 वें बलिदान दिवस के अवसर पर हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश से एक लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के सहभागी होने की संभावना है। जिसमें देश में वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली पर प्रबुद्ध विद्वान विचार करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी एक वर्ष में विभिन्न संगठनों के माध्यम से एक लाख युवाओं को आर्य समाज से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अनूप राठी ने कहा कि यह वर्ष आर्य समाज की स्थापना का 150 वां वर्ष है। बीते डेढ़ शताब्दी में आर्य समाज ने स्वतंत्रता आंदोलन, नारी शिक्षा, सामाजिक समरसता तथा कुरीतियों के उन्मूलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विपिन आर्य ने बताया कि इस उपलक्ष्य में देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ओस अवसर पर घऱ-घऱ यज्ञ मुहीम को सफल बनाने वाले तथा सत्यार्थ प्रकाश प्रतियोगिता मे उत्तीर्ण होने वाले लगभग 50 कार्यकर्त्ताओं सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ यज्ञ के माध्यम से हुआ। जिसका ब्रह्मत्व अमरेश शास्त्री रहे। उन्होंने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।सम्मेलन के पश्चात् शोभायात्रा का आयोजन किया गया। राज्यपाल के नाम ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया। इस अवसर पर कृष्णानंद स्वामी, रामानंद स्वामी, शांतनु आनंद मनी एवं जिला आर्य प्रतिनिधि सभा मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, हरिद्वार के अधिकारी एवं देवबंद के सभी स्थानीय आर्य नेता एवं कार्यकर्ता महीपाल आर्य, जिला मन्त्री अवनीश आर्य, राम किशोरी आर्य, मांगेराम आर्य पूर्व प्रधान, देवेन्द्र आर्य पूर्व प्रधान,अनिल आर्य, जनेश्वर प्रसाद, मुकेश आर्य, डा सुरेन्द्र आर्य, श्री अजब सिंह आर्य,अमरीश आर्य, मुकेश आर्य, पंकज आर्य, कन्हैया आर्य, विनोद आर्य, विकास आर्य, विजयपाल आर्य, शिवराज आर्य,डा महावीर सिंह आर्य, यशपाल आर्य,अनुराग आर्य, देवीदयाल आर्य,जनकवीर आर्य, अनिल त्यागी,सुरेन्द्र आर्य,स्वामी कृष्णानन्द, स्वामी सुतिक्ष, स्वामी शान्तनु जी, स्वामी ओमानन्द, नरेशना आर्या, रचना, उषा धीमान, मन्जू शर्मा, सुनीता आर्या, पूनम, संगीता, सोनिया, रहती देवी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजक राजबीर आर्य रहे। अध्यक्षता अशोक बहादुर आर्य शामली ने की एवं मंच संचालन चौ. विपिन आर्य ने किया।