वेतन आदि समस्यों को लेकर व्यवसायिक प्रशिक्षकों नें सौंपा ज्ञापन

वेतन आदि समस्यों को लेकर व्यवसायिक प्रशिक्षकों नें सौंपा ज्ञापन

वेतन आदि समस्यों को लेकर व्यवसायिक प्रशिक्षकों नें सौंपा ज्ञापन ।

माध्यमिक शिक्षा मंत्री के आवास पर एकत्रित हुए सभी व्यवसायिक प्रशिक्षक।

समय पर वेतन न मिलने व टेंडर अवधि 11 माह करने आदि समस्याओं से कराया अवगत।

उमेश गुप्ता जी न्यूज़ इंडिया।प। उत्तर प्रदेश प्रभारी

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चंदौसी।संभल। शनिवार को सभी प्रशिक्षक एकत्रित होकर माध्यमिक शिक्षा मंत्री के आवास पहुंचे और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
प्रशिक्षकों ने बताया कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश के समस्त व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी सेवा अवधि, मानदेय वृद्धि और नौकरी सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में प्रशिक्षकों ने अपनी समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
प्रशिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में शिक्षा मित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये तथा अनुदेशकों का 17 हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवा अवधि मात्र 7.5 माह निर्धारित कर रखी है। बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने के बाद उनकी सेवाएं खत्म कर दी जाती हैं और जुलाई में नए सत्र से पुनः नियुक्ति दी जाती है। इस दौरान उन्हें कोई मानदेय नहीं मिलता, जिससे परिवार के भरण-पोषण में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण प्रशिक्षकों का शोषण हो रहा है तथा कई महीनों तक मानदेय का भुगतान लंबित रहता है। कुछ प्रशिक्षकों को 6 माह से वेतन नहीं मिलने की बात भी सामने आई है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है।
प्रशिक्षकों ने अपनी प्रमुख मांगों में सेवा अवधि 7.5 माह से बढ़ाकर न्यूनतम 11 माह करने, 1 अप्रैल 2026 से मानदेय 30 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने, आउटसोर्सिंग सेवा आयोग को प्रभावी रूप से लागू करने, नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक माह की 1 से 5 तारीख के बीच अनिवार्य रूप से मानदेय भुगतान कराने की मांग की है। साथ ही समस्त व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवाएं सरकार के अधीन करने और कंपनियों की भूमिका समाप्त करने की भी मांग उठाई गई है।
प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तो वे आगे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। ज्ञापन की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।