मन में गढ़ी है मूरत तुम्हारी,हर पल निहारता रहता बनबारी। उत्कंठा बनी रहती है मन में,तुम्हें ही जपता रहूं रमणबिहारी

मन में गढ़ी है मूरत तुम्हारी,हर पल निहारता रहता बनबारी। उत्कंठा बनी रहती है मन में,तुम्हें ही जपता रहूं रमणबिहारी

मन में गढ़ी है मूरत तुम्हारी,हर पल निहारता रहता बनबारी।
उत्कंठा बनी रहती है मन में,तुम्हें ही जपता रहूं रमणबिहारी।।
विचलित न कर पाती बाधाएं,बैठे जो हृदय में शक्ति प्रदाता।
मोहिनी छवि से मिलता कौशल,क्यों घबराऊं भाग्य विधाता।।
माधव स्मरण बन जाता है संबल,फिर और चाहत रहती नहीं।
नाम की पूंजी देती सुख समृद्धि, कलुषता मन में रहती नहीं।।
मुरली मनोहर की श्यामल छवि,जीवन को यूं ही हर्षाती रहे।
दुःख रंज का पड़ने नहीं दे साया,हरि मुस्कान मुस्कुराती रहे।।

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सत्यप्रकाश पाण्डेय