श्री महालक्ष्मी त्रिशक्ति साधिका तृप्ति दीदी की आध्यात्मिक संचेतना

श्री महालक्ष्मी त्रिशक्ति साधिका तृप्ति दीदी की आध्यात्मिक संचेतना

भगवान शिव की नगरी काशी जो कि मणिकर्णिका के महाश्मशान के लिए विख्यात वह स्थान है जो देवी भगवती के शाप से शापित होने के कारण धधकती चिताओं की नगरी बना हुआ है जहां पर भगवान शंकर आज भी देवी पार्वती के खोए हुए मणिकर्ण को हर जलती चिता में ढूंढते हुए मृतात्मा को तारक मंत्र देते हैं इसीलिए काशी को मोक्ष की नगरी के नाम से जाना जाता है।
पुराणों के अनुसार काशी में मृत्यु के वरण से प्रत्येक मृतात्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है जबकि युगों युगों में इसी भूमि पर देवी के त्रिशक्ति स्वरूप की साधिका अवतरित होकर विश्व कल्याण के निमित्त अध्यात्म ,ज्ञान ,तप के महासंयोजन से त्रिशक्ति जो कि देवी का संयुक्त आद्य स्वरूप है जिसमें महाकाली , महालक्ष्मी तथा महासरस्वती की उपासना का विधान है , का निरूपण करेगी । ये साधिका दैवीय शक्तियों का साकार स्वरूप होगी ।
उपरोक्त समस्त संकेतों के दर्शन काशी वासी त्रिशक्ति महालक्ष्मी साधिका तृप्ति दीदी के विहंगम व्यक्तित्व में स्पष्टतया परिलक्षित होते है । जो बाल्यकाल से अपनी माताजी की देवीभक्ति से प्रभावित तथा परिवार के धार्मिक स्वरूप के कारण धार्मिक गतिविधियों में संलिप्त रहीं । चूंकि परिवार में मानवीय संवेदनाएं तथा मानवीय सेवा भावना व्याप्त थी अतः तृप्ति दीदी में उस आद्य शक्ति के प्रति जिज्ञासा जागृत हुई । वे माताजी के किसी परिजन से जब भी मिलती उनके अंदर एक नई जिज्ञासा पैदा हो जाती कि आखिर जीवन का उद्देश्य है क्या …….?
चिंतन , मनन और साधना के रथ पर सवार ये साधिका तरुनाई की ओर बढ़ी , गतिमान समय के साथ पिता ने अपना धर्म निभाया एक सुयोग्य पुरुष को कन्या का हाथ सौंपकर उसके अनंत उद्देश्य को साकार करने की राह तैयार कर दी । वैवाहिक जीवन मात्र पूर्णता का प्रयोजन था ।देवी तृप्ति गृहस्थ जीवन और कर्म क्षेत्र का निर्वहन जारी रखते हुए अपनी पूर्ण क्षमता से पति और परिवार के सहयोग से जनकल्याण के कार्यों में स्वयं को समर्पित किए रहीं ।जरूरतमंदों की शिक्षा , विवाह ,चिकित्सा हेतु सहायता करना , रक्तदान करना ,यथाशक्ति आर्थिक मदद करना , जैसे कार्य तृप्ति दीदी के जीवन का हिस्सा बने रहे । इन सभी के बीच वर्ष 2019 से मां श्री महालक्ष्मी त्रिशक्ति शरणम् के उद्देश्य से देवी श्री महालक्ष्मी त्रिशक्ति काशी खंड , मां को अपनी आराध्य और इष्ट के साथ मां की भावना रखते हुए भक्ति में लीन रहने लगीं ।
समय के साथ भक्ति भाव से प्राप्त मां की आशीष ऊर्जा का प्रभाव प्रत्यक्ष एवं पूर्ण रूप से जन मानस के मध्य अपनी ऊर्जा बिखेरने लगा जिसके परिणामस्वरूप देवी तृप्ति ने मां श्री महालक्ष्मी त्रिशक्ति से प्रात ऊर्जा के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश किया तथा जन जन में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के प्रयोजन से भक्ति , शक्ति , साधना , प्रार्थना को जीवन की सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम मानते हुए कर्म शील बनने की प्रेरणा देना ही निज साधना का उद्देश्य बना लिया ।
विगत छः वर्षों से मां की उपासना , साधना और प्रार्थना से प्राप्त प्रेरणा से जनमानस के बीच जीवन की समस्याओं से बाहर निकालने का कार्य जारी है जिसके उदाहरण केवल वाराणसी ही नहीं अपितु देश के विभिन्न भागों में देखने को मिलते हैं । जो भक्त दीदी से संपर्क करते हैं वे उनके सरल स्नेही स्वभाव और उनकी मधुर वाणी से ही अपने आपमें एक शांति की अनुभूति करते हैं। तृप्ति दीदी अपने भक्तों को हमेशा कर्म करने की प्रेरणा , धर्म के प्रति आस्था , सेवा भाव को विकसित करना , अहंकार,क्रोध,द्वेष,लालच से दूर रहने के लिए प्रेरित करती हैं। तृप्ति दीदी से जुड़ने वाला हर मनुष्य अपने परिवार , समाज ,देश , धर्म के प्रति कर्म शील होते हुए जीवन के अंतिम एवं श्रेष्ठतम विंदु पर स्थापित होने के लिए उनके आदर्शों को आत्मसात कर सकारात्मक ऊर्जा के साथ स्वयं के जीवन को ऊर्जावान बना सकता है क्योंकि ये मात्र स्वयं कल्याण का निमित्त नहीं मां श्री महालक्ष्मी त्रिशक्ति शरणम् का एक महामंत्र है जिसका आह्वान श्री महालक्ष्मी त्रिशक्ति साधिका तृप्ति दीदी द्वारा विश्वकल्याण के प्रयोजन से किया गया है , जो शाश्वत है , अभेद्य है , अकाट्य है ………..!