मथुरा पुलिस की नई पहल

मथुरा पुलिस की नई पहल

मथुरा पुलिस की नई पहल: डायल-112 मौके पर लेगी FIR आवेदन, पीड़ितों को नहीं लगाने पड़ेंगे थाने के चक्कर मथुरा। मारपीट और सड़क हादसों जैसे मामलों में अब पीड़ितों को मुकदमा दर्ज कराने के लिए थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिले में पुलिस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है।अब किसी भी घटना के बाद मौके पर पहुंचने वाली यूपी डायल 112 पुलिस घायलों को अस्पताल पहुंचाने के साथ-साथ उनका प्रार्थना-पत्र भी मौके पर ही लेगी। इसके आधार पर संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

घटना के बाद पीड़ितों को नहीं लगाने पड़ेंगे थाने के चक्कर

मारपीट, झगड़े या फिर सड़क हादसे में लोग सबसे पहले यूपी डायल 112 पुलिस को सूचना देते हैं। पुलिस के पहुंचने पर घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराने के लिए पीड़ितों को थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी थाना पुलिस मुकदमा दर्ज करने से भी इनकार कर देती है। ऐसे में न्याय के लिए पीड़ितों को उच्चाधिकारियों के पास पहुंचना पड़ता है।

एसएसपी श्लोक कुमार की समीक्षा बैठक में सामने आया है कि कई घटनाओं के बाद पीड़ितों को मुकदमा दर्ज कराने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।

समीक्षा बैठक में कई मामले सामने आने पर एसएसपी ने लिया निर्णय

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इसी समस्या को देखते हुए एसएसपी ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए नई पहल लागू करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति के साथ मारपीट, झगड़ा या अन्य कोई आपराधिक घटना होती है और वह घायल हो जाता है। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचने वाली डायल 112 की पीआरवी टीम पहले घायल को अस्पताल पहुंचाएगी। इसके बाद मौके पर या अस्पताल में ही पीड़ित से उसका लिखित प्रार्थना-पत्र लिया जाएगा।

थाना पुलिस शुरू कर देगी आगे की कार्रवाई

यदि पीड़ित स्वयं लिखने की स्थिति में नहीं है तो उनके स्वजन की बात सुनकर प्रार्थना-पत्र तैयार करके संबंधित थाने में देगी। इसके आधार पर संबंधित थाना पुलिस मुकदमा दर्ज करेगी और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर देगी। इससे पीड़ित को अलग से थाने जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और मामला दर्ज कराने में होने वाली देरी भी खत्म हो जाएगी।

पीड़ितों को मिलेगी इस व्यवस्था से राहत

एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि इस व्यवस्था से न केवल पीड़ितों को राहत मिलेगी, बल्कि कई मामलों में साक्ष्य भी समय रहते जुटाए जा सकेंगे। अक्सर ऐसा देखा गया है कि घटना के बाद मुकदमा दर्ज कराने में देरी होने से मामले कमजोर पड़ जाते हैं। लेकिन अब पीआरवी टीम के माध्यम से तुरंत शिकायत दर्ज होने से जांच भी तेजी से आगे बढ़ सकेगी।