जामा मस्जिद में हुआ क़ुरआन-ए-पाक मुकम्मल, मुल्क में अमन-ओ-चैन के लिए उठे हाथ
जामा मस्जिद में हुआ क़ुरआन-ए-पाक मुकम्मल, मुल्क में अमन-ओ-चैन के लिए उठे हाथ

जामा मस्जिद में हुआ क़ुरआन-ए-पाक मुकम्मल, मुल्क में अमन-ओ-चैन के लिए उठे हाथ
उमेश गुप्ता जी न्यूज़ इंडिया।प।उत्तर प्रदेश प्रभारी
सम्भल: उपनगरी सराय तरीन, मोहल्ला दरबार स्थित जामा मस्जिद में 27वीं शब-ए-तरावीह के मौके पर क़ुरआन-ए-पाक मुकम्मल किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
जामा मस्जिद दरबार के इमाम व खतीब हज़रत मौलाना व मुफ़्ती मुहम्मद रियाज़ उल हक़ क़ासमी ने अपने बयान में कहा कि अल्लाह तआला बहुत ग़फ़ूर-ओ-रहीम है। वह अपने बंदों से माँ से भी कई गुना ज़्यादा मोहब्बत करता है। अल्लाह तआला अपने उन बंदों के तमाम गुनाह माफ़ कर देता है।
चाहे वे कितने ही बड़े क्यों न हों
जो सच्चे दिल से तौबा करते हैं और दोबारा गुनाह न करने का पक्का इरादा करते हैं। इंसान को चाहिए कि वह कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस न हो।
उन्होंने क़ुरआन-ए-पाक की अज़मत और अहमियत बयान करते हुए उसकी तिलावत के फ़ज़ाइल बताए और कहा कि क़ुरआन एक आसमानी किताब है, जो पूरी इंसानियत को आपस में मोहब्बत और भाईचारा क़ायम करने का पैगाम देती है। यह एक-दूसरे की मदद करने, हमदर्दी दिखाने और हर तरह की बुराइयों से बचने की हिदायत देती है।
हजरत मौलाना मुफ्ती रियाज़ उल हक़ क़ासमी साहब ने मौजूद लोगों से कहा कि तरावीह पूरे रमज़ान महीने पढ़ी जाती है, लेकिन रमज़ान के बाद भी क़ुरआन की तिलावत और नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाए रखें। साथ ही हर तरह की बुराइयों, नशाखोरी और शराबनोशी से दूर रहें। उन्होंने वक़्त की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा कि हमें अपने वक़्त की क़द्र करनी चाहिए और उसे अच्छे कामों में लगाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अपने हमवतन भारतीय भाइयों के साथ मोहब्बत, प्यार और ख़ुलूस के साथ पेश आएं और सभी मज़हबों का एहतराम करें। इसी से समाज में आपसी भाईचारा और अमन-ओ-चैन कायम रहेगा।
बयान के बाद सभी लोगों ने दुआ के लिए हाथ उठाए। मुफ्ती मुहम्मद रियाज़ुल हक कासमी ने पूरी दुनिया में अमन-शांति कायम होने, आपसी मोहब्बत और भाईचारा बढ़ानें, गुनाहों की माफ़ी, उनसे बचने और माँ-बाप की इज़्ज़त व एहतराम करने के लिए अल्लाह की बारगाह में ख़ास दुआ कराई।
आखिर में सभी को मिठाई तकसीम कराईं गई।
इस अवसर पर वसीम खान,ज़क़ा उल्लाह खां, मुशर्रफ खा,फाज़िल सैफी, हाजी अराफात, काशिफ खां,मु.शाकिर सैफी, हाफ़िज़ साकिब, नाज़िश मियां,मु.मदस्सीर, सलीम खान आदि मौजूद रहे।

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