नवदुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कन्दमाता की भजन कीर्तन के साथ की गई पूजा-अर्चना, गूंजे माँ के जयकारे

नवदुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कन्दमाता की भजन कीर्तन के साथ की गई पूजा-अर्चना, गूंजे माँ के जयकारे

नवदुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कन्दमाता की भजन कीर्तन के साथ की गई पूजा-अर्चना, गूंजे माँ के जयकारे

नवरात्रि पर्व के पांचवे दिन नवदुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कन्दमाता की पूजा-अर्चना की गई l दक्षिणी कृष्णापुरी स्थित शाकम्भरी धाम मन्दिर में गीता श्याम सत्संग महिला मंडल द्वारा भजन कीर्तन किया l महिलाओं ने एकत्र होकर विश्व शान्ति की प्रार्थना के साथ भजनों से माता रानी का गुणगान किया और माता रानी की आराधना कर सुख समृद्धि की कामना की l इस दौरान मंदिर परिसर में जय माता दी के जयकारे लगातर गूंजते रहे l
मन्दिर के मुख्य पुजारी पंडित हवलदार के सानिध्य में आयोजित भजन कीर्तन में प्रधानाचार्या मंजू गोयल ने कहा कि देवी दुर्गा का पांचवां स्वरूप माँ स्कन्दमाता है जो कमल के आसन पर विराजमान होकर सिंह की सवारी करती है, सत्संग संयोजिका मनीषा गोयल ने बताया कि प्राचीन समय में तारकासुर नामक राक्षस ने सृष्टि में त्राहि-त्राहि मचा रखी थी जिसके खात्मे के लिए शिव-पार्वती ने स्कन्द, जिन्हें भगवान कार्तिकेय भी कहा जाता है को पुत्र रूप में जन्म दिया, उन्होंने कहा कि केले का भोग माँ स्कन्दमाता को अत्यंत प्रिय है l

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इस अवसर पर पवित्रा गोयल, राजकुमारी मित्तल, प्रकाशी शर्मा, दमयंती, प्रभा, मंजू सेन, अंकिता, रेखा शर्मा, शिमला, संगीता, सोहनबीरी, श्यामो, इलायची, शालू, खुशी, रूही आदि उपस्थित रही l