सफेदपलाश

सफेदपलाश

#सफेदपलाश (White Palash) को आयुर्वेद और तंत्र शास्त्र में ‘दिव्य औषधि’ और ‘चमत्कारी वृक्ष’ माना गया है। सामान्य नारंगी पलाश की तुलना में इसकी उपलब्धता बहुत कम होने के कारण इसे अत्यंत पूजनीय और प्रभावशाली माना जाता है।

 

आयुर्वेदिक विशेषता (Medicinal Significance) :

​आयुर्वेद में सफेद पलाश को ‘रसायन’ माना गया है, जो शरीर का कायाकल्प करने की क्षमता रखता है।

​स्मरण शक्ति और बुद्धि वर्धक:

इसके फूलों और बीजों के चूर्ण को मिश्री और दूध के साथ लेने से याददाश्त तेज होती है। इसे ‘मेध्य’ (Brain Tonic) औषधियों की श्रेणी में रखा जाता है।

​कुष्ठ और चर्म रोग: सफेद पलाश के बीजों का लेप और फूलों का अर्क पुराने से पुराने त्वचा रोगों, सफेद दाग (Leukoderma) और खुजली में सामान्य पलाश से कहीं अधिक प्रभावी माना जाता है।

​मधुमेह (Diabetes):

इसके पंचांग (फूल, पत्ती, छाल, जड़ और फल) का काढ़ा इंसुलिन के स्तर को प्राकृतिक रूप से सुधारने में सहायक होता है।

​गर्भाशय की शुद्धि:

महिलाओं में गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं और प्रदर रोग (White Discharge) में इसकी छाल और फूलों का विशिष्ट औषधीय उपयोग किया जाता है।

​नेत्र ज्योति:

सफेद पलाश के फूलों का अर्क आँखों की तपन शांत करने और दृष्टि दोष दूर करने वाली कुछ विशेष आयुर्वेदिक दवाओं में आधार के रूप में प्रयोग होता है।

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​2. तांत्रिक एवं आध्यात्मिक विशेषता (Spiritual & Tantric Significance)

​तंत्र शास्त्र में सफेद पलाश को ‘सिद्ध वृक्ष’ माना जाता है। इसे धन, सुख और शांति का कारक माना गया है।

​लक्ष्मी का वास:

ऐसी मान्यता है कि जिस घर के परिसर में सफेद पलाश का वृक्ष होता है, वहां दरिद्रता नहीं आती। इसे “धनवर्धक” माना जाता है।

​वास्तु दोष निवारण:

घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में सफेद पलाश का पौधा लगाने से वास्तु दोष दूर होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

​पवित्र समिधा:

तांत्रिक अनुष्ठानों और विशेष यज्ञों में इसकी लकड़ियों (समिधा) का उपयोग देवताओं को प्रसन्न करने और कार्यों में सिद्धि प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

​वशीकरण और आकर्षण:

तंत्र ग्रंथों के अनुसार, इसके फूलों का तिलक लगाने से व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ता है और आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है।

​ग्रह शांति:

इसे चंद्र ग्रह से संबंधित माना गया है। मानसिक अशांति और चंद्र दोष के निवारण के लिए इसकी जड़ को धारण करने या पास रखने का विधान मिलता है।

​3. दुर्लभता और पहचान

​वानस्पतिक पहचान:

इसका पेड़ दिखने में सामान्य पलाश जैसा ही होता है, लेकिन इसके फूल दूध के समान सफेद होते हैं।

​उपलब्धता:

यह पूरे भारत में कहीं-कहीं ही (जैसे मध्य प्रदेश के कुछ जंगलों या हिमालय की तलहटी में) पाया जाता है।