आजकल देसी किकर (बबूल) की फलियां आ गई हैं।

आजकल देसी किकर (बबूल) की फलियां आ गई हैं।

आजकल देसी किकर (बबूल) की फलियां आ गई हैं। आपके आसपास भी जहां कहीं देसी किकर (बबूल) हो, आप भी उसकी फलियां इकट्ठा कर लें।

ध्यान रखें कि जमीन पर गिरी हुई फलियां न उठाएं, अपने साथ कोई डंडा या हुक जैसी चीज ले जाएं। अब इन फलियों को तोड़कर बिना बीज वाली साफ और अच्छी फलियां (टुकड़े) अलग कर लें, जो बिल्कुल सही और स्वस्थ हों। अब इन्हें छांव में सुखाने के लिए रख दें।

ध्यान रखें कि अगर घुटनों में दर्द या चलने पर टक-टक की आवाज आती हो तो उसके लिए बीज वाली फलियां ज्यादा फायदेमंद होती हैं।

लेकिन अगर इसे धात रोग, स्वप्नदोष, पुरुष शक्ति बढ़ाने या वीर्य को गाढ़ा करने के लिए इस्तेमाल करना हो तो बिना बीज वाली फलियां लें।

कुछ दिनों बाद ये फलियां पूरी तरह सूख जाएंगी।

अगर इनका वजन 200 ग्राम हो जाए तो 200 ग्राम किकर का गोंद और 200 ग्राम धागे वाली मिश्री पंसारी से ले आएं।

अब गोंद को तवे पर हल्का सा भून लें और अलग पीस लें। मिश्री और किकर की फलियां भी अलग-अलग पीस लें। पहले इन्हें हमामदस्ते में मोटा-मोटा कूट लें, फिर मिक्सर ग्राइंडर से पीस सकते हैं।

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ध्यान रखें कि पीसते समय मिक्सर ज्यादा गर्म न हो। एक-दो राउंड चलाकर बंद कर दें, फिर दोबारा चलाएं।

इस तरह तीनों चीजों को अलग-अलग पीसकर छलनी से छान लें और किसी साफ डिब्बे में भरकर संभालकर रख लें।

यह मिश्रण निम्न समस्याओं में लाभकारी माना जाता है:

धात रोग और स्वप्नदोष
वीर्य का पतलापन
वीर्य में पस सेल्स होने और शुक्राणुओं की गतिशीलता कम होने में
जननेंद्रिय की अधिक गर्मी को कम करने में
खाने में स्वादिष्ट होता है और कैल्शियम की कमी को पूरा करने में मदद करता है
घुटनों, कंधों और पीठ के दर्द में भी लाभ देता है
इस चूर्ण का उपयोग हर प्रकृति (तासीर) वाला व्यक्ति कर सकता है।

अगर चाहें तो इसमें अपनी सुविधा अनुसार कुश्ता कली और प्रवाल पिष्टी जैसी वीर्यवर्धक औषधियां भी मिला सकते हैं।

अगर मिलानी हों तो एक-एक तोला मिलाई जा सकती हैं।

मात्रा (Dose):

इस चूर्ण की मात्रा 3 से 6 ग्राम (लगभग 1 से 1½ चम्मच) तक ली जा सकती है।

कफ प्रकृति वाले रोगी इसे शहद के साथ भी ले सकते हैं।

घरेलू नुस्खे
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