मुजफ्फरनगर में चर्चित युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का आगमन, साहित्यिक चर्चा ने बांधा समां

मुजफ्फरनगर में चर्चित युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का आगमन, साहित्यिक चर्चा ने बांधा समां

*मुजफ्फरनगर में चर्चित युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का आगमन, साहित्यिक चर्चा ने बांधा समां!*

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मुजफ्फरनगर। अपनी चर्चित पंक्तियों “मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते, और घर से निकलना ही पड़ा घर के वास्ते” के लिए देशभर में पहचान बना चुके युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का मुजफ्फरनगर आगमन हुआ, जहां उन्होंने स्थानीय साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों के साथ विचार-विमर्श किया। इस दौरान मो सुहैल (सम्पादक, विविध विचार समाचार पत्र) एवं प्रमुख समाजसेवी लवीकांत त्यागी से उनकी विशेष मुलाकात हुई। मुलाकात के दौरान साहित्य, समाज और वर्तमान समय में युवा पीढ़ी की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। कवि स्वयं श्रीवास्तव ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन के संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक यथार्थ को सरल शब्दों में अभिव्यक्त करने की अपनी शैली साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी कविताएं आम जनमानस के अनुभवों से जुड़ी होती हैं, जिससे लोग आसानी से स्वयं को जोड़ पाते हैं। इस अवसर पर मो सुहैल ने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली युवा कवियों का शहर में आगमन साहित्यिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान करता है। वहीं लवीकांत त्यागी ने भी कवि के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि समाज को सकारात्मक दिशा देने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।