महर्षि कश्यप केवल एक गोत्र के प्रवर्तक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता के आधार स्तंभ हैं
महर्षि कश्यप केवल एक गोत्र के प्रवर्तक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता के आधार स्तंभ हैं

देवबंद : महर्षि कश्यप केवल एक गोत्र के प्रवर्तक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता के आधार स्तंभ हैं : लोकेश वत्स एडवोकेट
महर्षि कश्यप जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी हुई आयोजित
कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि कश्यप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया
गोष्ठी में महर्षि कश्यप के जीवन दर्शन, उनके योगदान और वर्तमान समाज के लिए उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर हुई चर्चा
(गौरव सिंघल)
देवबंद (सहारनपुर)। श्री रामनवमी शोभायात्रा आयोजन समिति देवबंद के तत्वावधान में आज समिति कार्यालय, शिव विहार में महर्षि कश्यप जयंती के पावन अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि कश्यप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। गोष्ठी में महर्षि कश्यप के जीवन दर्शन, उनके योगदान और वर्तमान समाज के लिए उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर चर्चा हुई।
महर्षि कश्यप वैदिक काल के प्राचीनतम ऋषियों में से एक और सप्तर्षियों में प्रमुख माने जाते हैं। पुराणों के अनुसार वे ब्रह्मा जी के मानस पुत्र मरीचि ऋषि के पुत्र थे। उन्होंने आयुर्वेद, ज्योतिष और धर्मशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. लोकेश वत्स ने की तथा संचालन नितिन कश्यप ने किया। इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष डॉ. लोकेश वत्स एडवोकेट ने कहा कि महर्षि कश्यप केवल एक गोत्र के प्रवर्तक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता के आधार स्तंभ हैं। सप्तर्षियों में शामिल इस प्राचीन ऋषि ने वेदों, आयुर्वेद और समाज व्यवस्था को दिशा दी। आज की युवा पीढ़ी को उनके ज्ञान, तप और लोक कल्याण की भावना से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
मुख्य वक्ता स्तुति शर्मा एडवोकेट ने अपने विचार रखते हुए कहा कि महर्षि कश्यप ने हमें सिखाया कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। हमें उनके आदर्शों को अपनाकर शिक्षा और नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करना चाहिए, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए। सहारनपुर से आए मुकुल गुप्ता एडवोकेट ने कहा कि प्राचीन सप्तर्षि महर्षि कश्यप का जीवन हमें अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और समरसता का संदेश देता है। आज जब समाज में विभाजन की बातें हो रही हैं, तब उनका ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का विचार सबसे बड़ा मार्गदर्शन है। हमें एकजुट होकर सामाजिक सद्भाव के लिए काम करना होगा। रविंद्र कश्यप एडवोकेट ने कहा कि महर्षि कश्यप हमारे गौरव हैं। उनके वंशज होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके बताए मार्ग पर चलें। युवा वर्ग को नशा और भटकाव से दूर रहकर शिक्षा और स्वरोजगार की ओर बढ़ना चाहिए, यही महर्षि जी के प्रति हमारी सच्ची निष्ठा होगी। बी. के. कश्यप ने कहा कि महर्षि कश्यप ने समस्त सृष्टि को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। वे केवल ऋषि नहीं, युग-दृष्टा थे। हमें उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए कि जाति-पांति से ऊपर उठकर केवल कर्म को प्रधानता दें और समाज में भाईचारा बनाए रखें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। इस अवसर पर वी. के. कश्यप, अमन कुमार, नितिन कश्यप, दीपांशु कश्यप, पृथु वत्स, वीरेंद्र प्रताप सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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