यूपी बोर्ड परीक्षा मैं विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का शोषण न करे सरकार: डॉ. कुलदीप मलिक

यूपी बोर्ड परीक्षा मैं विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का शोषण न करे सरकार: डॉ. कुलदीप मलिक
यूपी बोर्ड परीक्षा के के मध्य नजर शिक्षक नेता एवं शिक्षा पर चर्चा कार्यक्रम के संस्थापक डॉ. कुलदीप मलिक ने यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का सरकार द्वारा शोषण न करने की अपील की है। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की ओर से परीक्षा के संचालन को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं जबकि जमीनी हकीकत यह है कि परीक्षा संचालन के दौरान सरकार विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के शोषण का कार्य कर रही है। यह बात उन्होंने कल परीक्षा के पहले दिन बागपत, शामली एवं मु.नगर जिले के कई परीक्षा केंद्रों का जायदा लेने के बाद बाद अपने अनुभव के आधार पर कही।
डॉ. मलिक के अनुसार यूपी बोर्ड पूरे विश्व में एक ऐसी संस्था है जो सबसे बड़ी परीक्षा को आयोजित करने का दम रखता है। इस बार की परीक्षा में भी रिकॉर्ड स्तर पर 54 से 55 लाख विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हो रहे है लेकिन जिस तरह की व्यवस्थाओं का सरकार वादा कर रही है वह जमीनी स्तर पर नदारत दिखाई देती है।
कुछ जगह परीक्षा केंद्रों के चयन पर भी डॉ. मलिक प्रश्न चिन्ह लगाते हुए बताया कि कुछ परीक्षा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए है जहां पर यातायात, बिजली और सुरक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था समुचित न होने के कारण विद्यार्थियों एवं शिक्षकों सहित परीक्षा के संचालन कर्ताओं को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार की मंशा पर प्रश्न उठाते हुए डॉ. कुलदीप मलिक ने बताया कि एक तरफ सरकार सुरक्षित परीक्षा के लिए हर परीक्षा कक्ष में दो दो व सीसीटीवी कैमरे लगवाने का वादा कर रही है वहीं दूसरी तरफ बहुत सारे परीक्षा केंद्रों पर समय देखने के लिए परीक्षा कक्ष में एक घड़ी तक भी नजर नहीं आ रही।
उन्होंने प्रत्येक ड्यूटी के लिए सरकार द्वारा शिक्षकों को मात्र ₹50 का मानदेय देने पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है और इस मानदेय को ₹50 से बढ़कर ₹1000 करने की मांग सरकार के सामने रखी है। एक शिक्षक की एक दिन में दो ड्यूटी लगाए जाने पर भी उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की। बागपत जिले में वित्तविहीन शिक्षकों की परीक्षा में ड्यूटी न लगाए जाने के संबंध में डॉ. कुलदीप मलिक ने कल बागपत जिले के डीआईओएस से मिलने की कोशिश की और उन्होंने क्वेश्चन किया कि अगर माध्यमिक शिक्षा परिषद, ऊ प्र के लगभग 25,000 वित्तविहीन शैक्षणिक संस्थान में कार्यरत लगभग साढ़े 3 लाख शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ा सकते हैं और परीक्षा के बाद उनकी कॉपी का मूल्यांकन भी कर सकते हैं तो फिर वह परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी क्यों नहीं कर सकते? वित्त विहीन शिक्षकों और प्रबंधकों के बारे में डॉ. मलिक ने अपने विचार रखते हुए सरकार और अधिकारियों पर हमेशा उनके प्रति पक्षपात का आरोप लगाया।
प्रत्येक परीक्षा केंद पर मानो चिकित्सक नियुक्त किए जाने के संबंध में डॉ. कुलदीप मलिक ने सरकार को चेताया कि आखिर आज सरकार को यह कदम उठाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उनके अनुसार अगर हिंदुस्तान और प्रदेश का 80% से ज्यादा विद्यार्थी अस्वस्थ है तभी इस तरीके की व्यवस्था आज सरकार ने परीक्षा केंद्रों पर करनी पड़ रही है जिसके लिए सरकार बधाई की पात्र नहीं बल्कि प्रश्नों के कटघड़े में होनी चाहिए कि आखिरकार भारत जैसे देश में ऐसी नौबत क्यों आ रही है?
उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द उनकी शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए इन समस्याओं के निदान का आग्रह किया।

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