सहारनपुर मंडल में सपा-कांग्रेस नेताओं के बीच बनी तल्खी और बढ़ती तकरार से विपक्षी तैयारियों को लगा तगड़ा झटका

सहारनपुर मंडल में सपा-कांग्रेस नेताओं के बीच बनी तल्खी और बढ़ती तकरार से विपक्षी तैयारियों को लगा तगड़ा झटका

सहारनपुर मंडल में सपा-कांग्रेस नेताओं के बीच बनी तल्खी और बढ़ती तकरार से विपक्षी तैयारियों को लगा तगड़ा झटका

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✍🏾रिर्पोट- सुरेंद्र सिंघल, वरिष्ठ पत्रकार, सहारनपुर मंडल,उप्र:।।
सहारनपुर। हाल ही में अपने 37 निर्वाचित सांसदों के साथ हुई बैठक में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के अपने पार्टी सांसदों, विधायकों और संभावित प्रत्याशियों को विधानसभा 2027 की चुनावी तैयारियों के निर्देश के अनुपालन में सपा ने जमीन पर उतरकर तैयारियां तेज कर दी हैं। उनकी दिक्कत स्थानीय कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की लोकप्रियता और मुस्लिमों पर पकड़ एवं सीटों की ज्यादा दावेदारी सामने आ रही है।
इमरान मसूद के बेहद करीबी सपा एमएलसी शाहनवाज खान ने आज वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल को बताया कि जनपद में विधानसभा की सात सीटें हैं। जनाधार और लोकप्रियता के हिसाब से कांग्रेस कम से कम पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। झगड़ा तलब दो सीटें बेहट और सहारनपुर देहात बनी हैं। जहां से पिछले चुनाव में सपा के उमर अली खान और मुरादनगर निवासी आशु मलिक तेली विधायक चुने गए थे। बतौर शाहनवाज खान इमरान मसूद ने लोकसभा चुनाव में बेहट, सहारनपुर नगर, सहारनपुर देहात तीनों सीटों पर जबरदस्त बढ़त हासिल कर मतदाताओं पर अपनी पकड़ साबित कर दी थी। दो-तीन साल से आशु मलिक और इमरान मसूद के बीच लगातार एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी जारी है और दोनों के बीच बेहद तल्खी और मनमुटाव है। इमरान मसूद चाहते हैं कि बेहट और सहारनपुर देहात और सहारनपुर नगर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव लड़े। पूर्व में इन सीटों पर मसूद समर्थक नरेश सैनी और मसूद अख्तर विधायक रहे हैं। 2007 में इमरान मसूद भी बतौर निर्दलीय बेहट का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। सहारनपुर जनपद की गंगोह और नकुड़ दो विधानसभा सीटें कैराना की सपा सांसद इकरा हसन के कैराना संसदीय क्षेत्र में आती हैं। गंगोह इमरान मसूद का गृह क्षेत्र है और नकुड़ से दो बार इमरान मसूद बहुत ही कड़े और करीबी मुकाबले में पराजित हुए थे। दोनों बार उनका मुकाबला डा0 धर्म सिंह सैनी से हुआ था। पिछले चुनाव में डा0 धर्म सिंह सैनी विपक्षी गठबंधन उम्मीदवार थे और इमरान मसूद के समर्थन के बावजूद वह कुछ सौ वोटों के अंतर से भाजपा के मुकेश चौधरी से पराजित हो गए थे। भाजपा में पूर्व काबिना मंत्री साहब सिंह सैनी, मौजूदा राज्यमंत्री जसवंत सैनी और डा0 धर्म सिंह सैनी समेत तीन बड़े सैनी बिरादरी के नेता हैं। जसवंत सैनी गंगोह सीट से भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं। चौधरी यशपाल सिंह के उत्तराधिकारी उनके दोनों बेटे चौधरी इंद्रसेन और चौधरी रूद्रसेन में से कोई एक सपा-कांग्रेस गठबंधन से गंगोह या नकुड़ से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व ने इस परिवार को चुनाव तैयारी के लिए कह दिया है। पूर्व विधायक और इमरान मसूद के करीबी मसूद अख्तर ने आज आशु मलिक पर तीखे हमले करते हुए कहा कि वह लगातार जनपद में बिरादरीवाद फैला रहे हैं और लोकप्रिय नेता इमरान मसूद के खिलाफ जहर घोलने से बाज नहीं आ रहे हैं। दलित समाज के देवबंद निवासी युवा दलित नेता जसबीर बाल्मिकी जिन्होंने 2024 की लोकसभा चुनाव में हाथरस सुरक्षित सीट पर भाजपा को बेहद कड़ी टक्कर दी थी, ने आज कहा कि समाजवादी पार्टी सहारनपुर जनपद में कांग्रेस के लिए रामपुर मनिहारान समेत दो सीटें छोड़ेगी। इसके उलट शाहनवाज खान ने दावा किया कि कांग्रेस जनपद में पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। पूर्व मंत्री और जिले की सियासत के जानकार एवं वर्तमान में भाजपा में सक्रिय संजय गर्ग कहते हैं कि बतौर सांसद इमरान मसूद जनपद के मुसलमानों पर जबरदस्त पकड़ रखते हैं और हालात ऐसे हैं कि 80 फीसद मुसलमान इमरान मसूद के साथ जाएगा और सपा मुश्किल से 20 फीसद मुसलमानों में ही हिस्सेदारी कर पाएगी। पूर्व बसपा सांसद पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान अखिलेश यादव के साथ आ गए थे। वह आशु मलिक, उमर अली खान, सपा के एक ही खेमे में हैं। लेकिन इन लोगों का जनाधार बेहद सीमित है। इमरान इन सभी पर भारी पड़ते हैं। समाजवादी पार्टी मौजूदा विधायक बेहट से उमर अली खान और सहारनपुर देहात से विधायक आशु मलिक एवं देवबंद से पूर्व विधायक एवं पूर्व पालिका अध्यक्ष माविया अली को चुनाव लड़ाना चाहती है। ये तीनों नेता लगातार इमरान मसूद के खिलाफ तीखी बयानबाजी कर रहे हैं। जिले के जो मौजूदा सियासी हालात हैं उसमें माहौल भाजपा के पक्ष में नहीं हैं। जातीय समीकरण भी भाजपा के अनुकूल नहीं है। जिले में करीब 42 फीसद मुस्लिम और 22 फीसद से ज्यादा दलित वोट हैं और एसआईआर में बड़ी संख्या में भाजपा के वोट कम हुए हैं। लेकिन सपा-कांग्रेस के झगड़े के चलते विपक्षी गठबंधन भाजपा को कड़ी चुनौती पेश कर पाएगा इसकी संभावनाएं बेहद ही क्षीण हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गिरते-पड़ते और प्रशासन की मदद से नकुड़, सहारनपुर नगर और देवबंद में जीत दर्ज करने में जरूर सफल हो गई थी और यदि इस बार प्रशासन निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराता है और विपक्षी गठबंधन में ठीक से तालमेल हो जाता है तो भाजपा के सामने निश्चित ही दिक्कत पेश आएगी। गंगोह सीट पर भाजपा उम्मीदवार बदलेगी। पिछले चुनाव में उसने नकुड़, बेहट और सहारनपुर देहात सीट पर नए उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे लेकिन फिलहाल जिले में इमरान मसूद और आशु मलिक के बीच सियासी टकराव की खबरें लगातार अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं।
बताया जाता है कि इमरान मसूद को घेरने की रणनीति सीधे अखिलेश यादव की है। अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच बहुत मधुर संबंध हैं। देखना होगा दोनों नेता सहारनपुर में मौजूदा टकराव को किस तरह से दूर कर पाते हैं या नहीं। इसी पर उनकी भाजपा से लड़ाई निर्भर करेगी।