2027 में भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय- नसीमुद्दीन
2027 में भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय

2027 में भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय, मुजफ्फरनगर में गरजे नसीमुद्दीन, बोले- महंगाई और उत्पीड़न से त्रस्त जनता करेगी हिसाब’ मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज प्रदेश की जनता महंगाई, किसान विरोधी नीतियों और दलित उत्पीड़न से त्रस्त है।शुक्रवार को महावीर चौक स्थित सपा कार्यालय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया कि जनता की नाराजगी इस कदर बढ़ चुकी है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अखिलेश यादव के नेतृत्व में पांचवीं बार सपा की सरकार बनाने के लिए अभी से पूरी ताकत से जुट जाएं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि आज प्रदेश के गन्ना किसानों की सबसे बड़ी मांग गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि की है, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों किसान गन्ने की खेती पर आश्रित हैं, किंतु गन्ने का उचित भाव न मिलने से वे गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। खेती की लागत निरंतर बढ़ रही है; डीजल, खाद और बिजली के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा।
सिद्दीकी ने कहा कि किसान साल भर खून-पसीना एक करता है, लेकिन फसल बेचने के समय उसे केवल निराशा ही हाथ लगती है। सरकार केवल कागजों पर किसान हितैषी होने का दावा करती है, जमीन पर कोई ठोस कदम नजर नहीं आता। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वास्तव में किसानों का भला चाहती है, तो उसे तत्काल गन्ने के दाम बढ़ाकर उन्हें राहत देनी चाहिए।
इसके साथ ही पूर्व मंत्री ने दलितों पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलित समाज के उत्पीड़न की बढ़ती घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं। कई मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे समाज में असुरक्षा और भय व्याप्त है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर वर्ग को सम्मान और सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इसके बिल्कुल विपरीत हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि उनका बचपन, शिक्षा और नौकरी इसी क्षेत्र में हुई है, इसलिए यह क्षेत्र उनके लिए विशेष महत्व रखता है। हालांकि, उनकी प्राथमिकता पूरे प्रदेश को सशक्त बनाने की है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण रसोई गैस की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी पर उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कटाक्ष किया कि जब पहले महंगाई बढ़ती थी, तो स्मृति ईरानी सड़कों पर सिलेंडर और चूड़ियां लेकर प्रदर्शन करती थीं, लेकिन आज बढ़ती महंगाई पर उनकी चुप्पी आश्चर्यजनक है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि वे चाहे किसी भी दल में रहे हों, अखिलेश यादव के नेतृत्व के प्रति उनके मन में सदैव सम्मान रहा है। उन्होंने घोषणा की कि अब उनका राजनीतिक भविष्य पूरी तरह समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के प्रति समर्पित है। महंगाई के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। महिला सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारे केवल दीवारों तक सीमित हैं, हकीकत में बहू-बेटियों के साथ हो रहे अपराध सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर केवल ‘इवेंट मैनेजमेंट’ और प्रचार की राजनीति करने का आरोप लगाया।
अंत में सिद्दीकी ने दावा किया कि प्रदेश की जनता भाजपा के छलावे को समझ चुकी है और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा का “सूपड़ा साफ” कर ऐतिहासिक बदलाव लाएगी।
इस दौरान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे: सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी, चरथावल विधायक पंकज मलिक, सपा राष्ट्रीय सचिव राकेश शर्मा, प्रदेश सचिव नौशाद अली, प्रदेश सचिव श्यामलाल बच्ची सैनी, पूर्व जिलाध्यक्ष सतेंद्र सैनी, सपा नेता सोमपाल सिंह कोरी, साजिद हसन, आमिर कासिम एडवोकेट, चौधरी विकिल, गोल्डी अहलावत, तहसीन मंसूरी, सत्यदेव शर्मा, चौधरी अजय कुमार, डॉ. अविनाश कपिल, संजीव आर्य, डॉ. इसरार अल्वी, नावेद रंगरेज, सचिन पाल, मीर हसन, कपिल मलिक, लोकेंद्र कुमार, बालमुकुन्द ग्रेड, नदीम मलिक, पवन पाल, रजनीश यादव, कोमल वाल्मीकि, रामपाल सिंह पाल, फिरोज अख्तर, पंकज सैनी, श्यामसुन्दर, रविकांत त्यागी, रमेश चंद शर्मा, अनुज गुर्जर, इमरान खान एडवोकेट, डॉ. अली शेर अंसारी, सैयद मौहम्मद मेंहदी, अनैश निर्वाल, शादाब राणा, तरुण सौदे एडवोकेट, जाउल चौधरी, बालेंद्र मौर्य, चौधरी मेहरबान, सनव्वर राणा, अनुराग पाल, राव नफीस, गजेंद्र प्रधान, रेशु शर्मा, समुंदर सेन सहित अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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