चंद्र एक शीतल ग्रह ,जिसे रानी की संज्ञा प्राप्त है ।
चंद्र एक शीतल ग्रह ,जिसे रानी की संज्ञा प्राप्त है ।

चंद्र
एक शीतल ग्रह ,जिसे रानी की संज्ञा प्राप्त है । जिस प्रकार राज्य में राजा के सामने किसी की नहीं चलती,परन्तु राजा की अनुपस्थिति में रानी जरूर अपना कार्य सिद्ध कर सकती है। उसी तरह चन्द्रमा जब सूर्य(राजा) से कुंडली में दूर हो तो बलवान होता है । इसलिए पक्षबल ही चन्द्र का असली बल है।
चन्द्रमा शीतल है ,शांत है। नवग्रहों में एक मात्र ऐसा ग्रह है जो किसी को शत्रु नहीं मानता,अर्थात अजातशत्रु कहलाता है। वैसे भी रानी चाल चला करती है वह इन प्रपंच में नहीं पड़ती। वह शनि जैसे शीत,वायु प्रधान ग्रह के साथ हो तो नीलकंठ योग बना के शिव भक्त बना सकती है। चिकित्सा ज्योतिष में चंद्र रक्त , नेत्र , कफ़ रोग , जलीय रोग , गर्भ ,यूट्रस, टीबी, डायरिया , स्तन,मानसिक,पागलपन,सफेद दाग, फेफड़ों के रोग ,नींद में चलना , डिहाइड्रेशन, आंखों के नीचे कालापन, नशे की लत आदि समस्या देता है । स्त्री जब गर्भवती हो , पांचवे महीना कैसा गुजरेगा वह पूर्ण उसकी कुंडली में चंद्र पर निर्भर करता है।चंद्र में कुछ तत्व छल का भी है , वह किसी भी भाव में हो वहां व्यक्ति कुछ नटखट तो होता ही है चाहे दिखाए नहीं। चन्द्रमा जिस प्रकार पक्षों में घटता बढ़ता है, उसी तरह कुंडली में जिस भाव में जाएं वहां उतने तेज ही मूडस्विंग होते है । व्यापारियों का चन्द्रमा 2,7,11 में अक्सर 15 दिन बढ़िया काम , 15 दिन हल्का काम ऐसा दिखा सकता है । चन्द्रमा जब 1,2,4,5,9,7,10,11 भाव में हो सूर्य से दूर हो ,गुरु ,शुक्र बुध के प्रभाव में हो तो यह शांत बहने वाली नदी के समान होता है अर्थात स्वस्थ मानसिक स्थिति रहेगी। अन्य स्थान में चन्द्रमा पीड़ित हो ,शनि ,राहु ,केतु , या सूर्य के पास तो ऐसा समझें जैसे पानी में ठहराव हो , दूषित हो। गहरा काला जल।
शनि चंद्र युति ,चंद्र राहु ,चंद्र केतु के साथ चंद्र असहज तो होता है क्योंकि रानी कहां महलों में निवास करने वाली ,राहु ,केतु द्वारपाल ,शनि सेवक वर्ण। परन्तु इन्हें साथ देखकर तुरंत मानसिक व्याधियों की भविष्यवाणी नहीं करनी चाहिए। डिप्रेशन में चंद्र जरूरी है परन्तु तीसरा ,चौथा भाव लगभग बराबर के लिए जिम्मेदार है। पंचम संयुक्त हो जाए तो मिर्गी के दौरे , बेहोशी , पागलपन तक हो जाता है। कभी भी आप चन्द्रमा पर विचार करें उसके साथ तीसरा भाव जरूर देखें यह व्यक्ति की सोच बताएगा। जैसे शास्त्र कहते है तीसरे स्थान में षष्ठ का मालिक हो तो पूरे गांव से बदला लेगा। क्योंकि ये भाव रिएक्शन का है। तीसरे भाव में 6,8,12 के मालिक ठीक नहीं होते कुछ रूढ़िवादी या ऐसी विचारधारा देते है जो उसे मुसीबत में डाल दें। परन्तु अष्टमेश तीसरे में शोध शक्ति देता है ,द्वादशेष तीसरे में इमेजिनेशन देता है , षष्ठ का स्वामी तीसरे में सेना ,खेल,योग, कुश्ती ,डिफेंस के लिए अच्छा होता है। बालारिष्ट में जिसमें शिशु की मृत्यु , काफी कष्ट होता है यह चंद्र पर निर्भर करता है । ऐसे में मैने देखा है कोई भी मां अपने बच्चे के लिए अगर वह स्वास्थ्य से परेशान है ,बहुत ही कष्ट में रहता है तो ,शीतला मंदिर दर्शन ,पूर्णिमा व्रत ,स्कंद षष्ठी व्रत करें ,शिव भक्ति ,पूर्णिमा को चंद्र को अर्क देना ऐसे में बच्चे के स्वास्थ्य में अनुकूल प्रभाव आता है । चंद्र तीसरे या पंचम में बहुत अच्छा होता है कलाकारी,संगीत के लिए। सप्तम का चंद्र चिपकू किस्म का जीवनसाथी देता है,इसपर अशुभ प्रभाव न हो वह बहुत ही भावनात्मक रूप से जुड़ा साथी देगा , उसको दूर जाना भाएगा नहीं । मैने संतान चिंतन में अनुभव में देखा है 1,5,7 स्थान का चंद्र पुत्र जरूर देता है चाहे 2 बहनों के बाद हो ये एक बहन या चार बहन के बाद । चौथा , नवम ,एकादश का चंद्र पीड़ित न हो तो जीवन में कंफर्ट देता है । दशम का चंद्र तब अच्छा है जब व्यक्ति शेखचिल्ली न हो और धरातल में मेहनत करता हो तब वह उसे अच्छा पद देता है। 6,8 भाव में किसी भी वर्ग कुंडली के चंद्र जाए तो अत्यधिक चिंतन करता है व्यक्ति उस वर्ग अनुसार ,जैसे नवांश के 6,8 में गया तो अपने धर्म ,जिम्मेदारी ,विवाह के प्रति ,दशमंश में 6,8 में जाए तो इज्जत ,करियर के प्रति अधिक चिंतन करेगा , D 20 के 6,8 में जाए तो सोचेगा भगवान मिलेंगे या नहीं ,साधना सिद्ध होगी या नहीं ,d 12 में माता पिता के प्रति चिंतन।
चंद्र से बनने वाले योग सुनफा वगैरह ये जीवन में कंफर्ट देते है , चन्द्रमा के लिए सबसे अधिक दिक्कत है अकेला रहना ,युति ,दृष्टि से रहित फिर वह डरता है। केमद्रुम योग अकेलापन देता है ,नवांश में चन्द्रमा शुभ ग्रहों की युति में हो तब यह अकेलापन उसको निखारता है वरना सोचता रहेगा । केमद्रुम योग के लिए एक समर्पित प्रयोग है कि आने वाली पूर्णिमा तिथि से शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करे और हर सोमवार 108 लोटा जल भगवान शिव को अर्पित करे तो 5,6 महीने में अंतर दिखने लगेगा मानसिक स्थिति और पैसे के बहाव में । केमद्रुम योग तब आता है जब अत्यन्त मन दुखाया हो जीव का पूर्व जन्म में । जैसे वाचिक ,मानसिक , दैहिक पाप कर्म होते है ,वैसे ही चन्द्रमा कुंडली में खराब तब मिलता है जब मानसिक दुख दिया हो , मानसिक उत्पीड़न किया हुआ हो,भोजन के साथ छेड़कानी की हो ओर अंत में मातृ ऋण ।
। नवांश या d 24 में पंचम में चंद्र हो तो philosophy, psychology,script writing इसमें स्वाभाविक अच्छा होता है। कोई भी महादशा हो चंद्र उससे कैसा ही एक्सिस में बैठा हो ,चंद्र की शुभ अशुभ अवस्था क्या ही हो मैने देखा है चंद्र अंतर्दशा छोटा मोटा रोग , स्वास्थ्य पर खर्चा करवा ही देती है । क्योंकि लग्न ,नवांश ,d3,d12,d30 कहीं न कहीं वह अशुभता पकड़ ही लेगा ऐसे में सौम्य चंद्र परेशान होता है और जो इस पकड़ में न रहा हो वह भाग्यशाली समझे अपने को। चन्द्रमा को हम भगवान शिव से जोड़ते है परन्तु सूर्य ही शिव भक्त प्रदाता है,फिर चंद्र ओर शनि है।
चन्द्रमा जब ईष्ट देवता बन रहा हो चाहे पंचम भाव से , मंत्र पद से , या कारकांश से द्वादश भाव से तो यह देखें अगर वह विषम संख्या में है तब भगवान शिव की भक्त करें , 2,4,6,8,10,12 में हो तो देवी उपासना , ओर चंद्र कही भी हो अगर उसपर संयुक्त बुध शुक्र प्रभाव हो तो श्रीकृष्ण की भक्ति करें । आयुर्वेद में शंखपुष्पी, ब्राह्मी , शतावरी चंद्र के लिए सर्वश्रेष्ठ है । शिरोधारा, चंद्र भेदी प्राणायाम इसके लिए सर्वश्रेष्ठ है।

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