#दमा, #श्वास, #कास की रामबाण औषधि
#दमा, #श्वास, #कास की रामबाण औषधि

#दमा, #श्वास, #कास की रामबाण औषधि #वासाघृत –
निर्माण विधि – १॥ सेर बांसा (अडूसा) की जड़ खोद लावें और उसको अच्छी तरह पानी से धो डाले और – फिर उसके छोटे १-१ अंगुल के टुकड़े करले । इसके बाद मिट्टी या पत्थर के किसी चौड़े पात्र में या लकड़ी के पात्र (कठौता) में उनको रख कर और एक पाव बकरी का दूध डालदे और धूप मे रख दें। दिन भर धूप में रखने से दूध सूख जायगा। बीच में एक दो बार लकड़ी से चला दें। इस प्रकार रोजाना ४० दिन तक नियम से पात्र भर बकरी का दूध डाल कर धूप में रख दिया करें। तात्पर्य यह कि प्रतिदिन ४० दिन तक पाव भर बकरी का दूध डाल कर सुखावें। (यदि गरमी होगी तो १ दिन से ही दूध सूख जायगा, किन्तु जाडे में २ दिन भी लग सकते हैं। इस हिसाब से ४० दिन से ज्यादा भी समय लग सकते हैं।)
तत्पश्चात् एक चौड़ी हांडी में (हांडी इतनी बड़ी हो जिसमें दवा आजावे) उसे डाल देवे, हां हाडी में दवा डालने से पहिले उस हांडी में एक छोटा सा मटर के बराबर मोटा गोल छेद कर देना चाहिये। बाद में दवा भर कर ऊपर से एक बराबर फिट बैठने वाला ढकन मिट्टी का रख कर कपरौटी करदे सिर्फ ऊपर ही गले तक करना चाहिये। इसके बाद एक जमीन में १। हाथ लम्बा इतना ही चोडा ‘और इनना ही गहरा गड्ढा (गर्त) खोटे (जमीन गीली न हो) और इस गड्ढे के बीच में एक छोटा सा गड्ढा करीब ६ अगुल का जौड़ा तथा इतना ही लम्वा ओर ४ अंगुल गहरा खोदें इस छोटे बीच वाले गढ़े में एक कांसे की कटोरी रख दें जो कि गड्ढे में बिल्कुल फिट आती हो। इस कटोरी की ऊंचाई गड्ढे के ऊपर न होनी चाहिये, बाद में हांडी उस गड्ढे में इस तरह से रखें जिससे हांडी का छेद नीचे की कटोरी के बीचों-बीच में हो, बाद में अगल-बगल चारों ओर खूब कंडे (अगर विनवा हों तो ज्यादा अच्छा) भर दें और ऊपर भी कण्डे रख दें, बाद मे ‘आग लगादें। अगर कण्डे तेजी से जलने लगें तो पानी का हल्का छींटा मारदे ऊपर से कोई चीज ढक दें ताकि आग धीरे २ सुलगे। जब सब आग अपने आप ठडी पड़ जाय (स्वांग शीतल हो जाय) तब धीरे से पहिले सब राख निकाले और राख निकालने के बाद सहारे से हांडी अलग करें, आप देखेगे कि उस नीचे की कटोरी में घृत जैसा पदार्थ होगा जो कि दूध का घी बन कर अडूसे के तत्व को खींच कर कटोरी में टपक जाता है। इसे आप यदि जिसमें राख न मिली हो (असावधानी से कभी राख मिल जाती है तो उसे कपड़े से छान लेना चाहिये) शीशी में भर कर रख लें ।
#गुण- समस्त प्रकार के श्वास, कास, उर’क्षत, मुंह से खूनका आना, हिचकी तथा बच्चों की कुकर-खासी आदि में पूरी मात्रा में एक सींक सुबह और एक सींक शाम को बंगला पान में दें; अद्भुत लाभ होता है। छोटे बच्चों को ‘आधी सींक बङ्गलापान के रस में या मां के दूध में दें, जादू की तरह पहले ही दिन एक ही दो सींक में लाभ मालूम हो जायगा। अत्ति वृद्ध श्वाम भी ८ दिन के सेवन से बिल्कुल नष्ट हो जावेगा। बच्चों के पसली चलने पर भी तुरन्त लाभ होगा। राजयक्ष्मा में लाभदायक है। सिर दर्द होता हो और इसका नस्य दिया जाय तब भी लाभ होता है।
कफ वाली खांसी तथा सब तरह की श्वास पर तो चमत्कार ही दिखाता है। दमा-श्वास तो एक दिन मे ही ऐमे बन्द हो जाता है जैसे कि डाक्टरों दवा-एफेड्रीन से बन्द होता है।

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