महानगरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में नशीले पदार्थों का जाल..!!*
महानगरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में नशीले पदार्थों का जाल..!!*

*महानगरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में नशीले पदार्थों का जाल..!!*
*युवा वर्ग भविष्य और जान दोनों को खतरे में..!*
*युवाओं की इन तक आसानी से पहुंच कैसे संभव..?*
आज युवा किस हाल में है यह सबको नजर आ रहा है लेकिन सरकारों को नजर नहीं आ रहा है आज देश के महानगरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में नशीले पदार्थों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा और गहरा प्रभाव युवा वर्ग पर पड़ रहा है, जो उनके भविष्य और जान दोनों को खतरे में डाल रहा है। यह केवल व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी बड़ी चुनौती बन गया है। युवाओं के सामूहिक रूप से नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने के लिए विशेष आयोजन की खबरें भी अक्सर आती रहती हैं। मगर, अब इस तरह के आयोजनों का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसी कई घटनाएं देश में सामने भी आई, जहां नशीले पदार्थों के अत्यधिक सेवन से प्रबंधन संस्थान में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की मौत हो गई हो यही ही नही युवाओं ने भी जाने गवाई चुके हैं।सवाल है कि जब नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और खरीद के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान है, तो फिर युवाओं की इन तक आसानी से पहुंच कैसे संभव हो पा रही है? यह बात छिपी नहीं है कि नशीले पदार्थों की बिक्री और इनके सेवन के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। ‘रेव पार्टी’ की बजाय अब संगीत कार्यक्रमों की आड़ में इस तरह के आयोजन किए जाते हैं। यह बेहद चिंताजनक है कि पिछले कुछ वर्षों में मनोरंजन की आड़ में युवाओं में नशाखोरी की प्रवृत्ति बढ़ी है, लेकिन इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार और प्रशासन के स्तर पर गंभीरता से प्रयास करने की इच्छाशक्ति कहीं नजर नहीं आती है! जबकि युवाओं में नशाखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति से आपराधिक घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं! हैरानी की बात है कि संगीत कार्यक्रमों की अनुमति देने से पहले प्रशासन की ओर से जांच और निगरानी की जरूरत महसूस नहीं की जाती है! जब तक सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर सतर्कता नहीं बरती जाएगी, तब तक यह समस्या हल नहीं हो पाएगी।

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