सुरजन का राजू आज के आंचलिक समाज शास्त्र का जरूरी दस्तावेज है: डा. पंकज पुष्कर
सुरजन का राजू आज के आंचलिक समाज शास्त्र का जरूरी दस्तावेज है: डा. पंकज पुष्कर

सुरजन का राजू आज के आंचलिक समाज शास्त्र का जरूरी दस्तावेज है: डा. पंकज पुष्कर
✍🏾रिपोर्ट : सुरेंद्र सिंघल, वरिष्ठ पत्रकार.
वसुंधरा (गाजियाबाद)। गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर 9, जनसत्ता आवास समिति में प्रख्यात पत्रकार एवं लेखक और समाज शास्त्री दिवंगत अरूण कुमार पानी बाबा द्वारा लिखित उपन्यास सुरजन का राजू का समारोह पूर्वक लोकार्पण किया गया। इस उपन्यास को अरूण कुमार पानी बाबा की पत्नी पूर्णिमा अरूण ने प्रकाशित कराया है। इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह में अनेक विद्वान, लेखक, पत्रकार और राजनैतिक शामिल हुए।
समारोह का संचालन पूर्णिमा अरूण ने किया। पूर्व विधायक डा. पंकज पुष्कर ने कहा कि यह उपन्यास जाति, जेंडर और भाषा जैसे समकालीन विमर्श जटिल विषयों को देखने का एक नया साहस और एक नई सूझबूझ सुझाता है। पानी बाबा द्वारा सर्जित और पूर्णिमा अरूण द्वारा सहेजा यह उपन्यास देश की शिक्षा, समाज और राजनीति के रचनाकारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध समाज शास्त्री श्यामा चरण दूबे से भारतीय समाज को समझने के एक प्रस्थान बिंदु पूछे गए जिस पर दूबे ने कहा कि प्रेम चंद का गोदान, गुलशेर खां साहनी का काला जल और राजेंद्र यादव का सारा आकाश वे पहली किताबें हैं जिन्हें समाज शास्त्र के छात्र को पढ़नी चाहिए। पश्चिमांचल के लोक इतिहास को समझने के लिए इस उपन्यास सुरजन के राजू को पढ़ना अनिवार्य है। उद्भावना पत्रिका कें संपादक अजय कुमार ने इस पुस्तक के लोकार्पण के लिए पूर्णिमा अरूण को बधाई दी और पुस्तक के मुख्य पृष्ठ के डिजायनर नीलाभ परासर की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्कृति में बराबरी होगी तो सामाजिक बराबरी आ ही जाएगी। समाज को जिंदा रखने के लिए लीक से हटकर सोचना भी जरूरी है। पुस्तक में राजू के कुंजड़ा होने के दर्द को बहुत मार्मिक तरीके से व्यक्त किया गया है।
कार्यक्रम की शुरूआत गायिका श्रीमती कौशल्या चारीयार की गणेश वंदना से हुई। लोकार्पण कार्यक्रम अरूण कुमार पानी बाबा की दसवीं पुण्य तिथि पर अक्षय तृतीया के अवसर पर उनके जनसत्ता आवास परिसर में हुआ। अरूण कुमार पानी बाबा वरिष्ठ पत्रकार के साथ साथ डा. राममनोहर लोहिया के करीबी रहे हैं। इस मौके पर विजय प्रताप, प्रोफेसर राजकुमार जैन, प्रोफेसर रितू प्रिया, अरविंद मिश्र, राजबीर, वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्र और शंभूनाथ शुक्ला, एनडीटीवी के प्रिय दर्शन, संजय कुंदन, कहानीकार स्मिता सिन्हा, मेरा रंग की सालिनी श्रीनेत, वरिष्ठ सुरेंद्र सिंघल, उषा जोशी, राजीव गांधी फांउडेशन के प्रफुल्ल जी, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर विजय चारियार, टाइम्स आफ इंडिया में डिजिटल मीडिया के विशेषज्ञ दिनेश श्रीनेत, जनसत्ता के प्रधान संपादक रहे प्रभाष जोशी की पत्नी समेत अनेक विद्ववतजन शामिल थे। दिनेश श्रीनेत ने लोकार्पण समारोह में कहा कि हिंदी प्रदेश के नवजागरण की झलक इस उपन्यास में दिखाई देती है। यह उपन्यास एक व्यक्ति के निजी प्रयासों से शुरू होकर समुदाय के भीतर घटित होने वाले परिवर्तन की कथा कहता है। साथ ही यह तत्कालीन और कुछ हद तक समकालीन भारत में व्याप्त जाति प्रथा और शिक्षा के अभाव एवं अन्य सामाजिक विडंबनाओं पर प्रकाश डालता है। पुस्तक के केंद्र में नारी के स्वातंत्रय और शक्ति का आह्वान है। जिसके आधार पर परिवार और समाज को संगठित करके युवा शक्ति को सुशिक्षित करके समाज के उत्कृष का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। पुस्तिक की भूमिका आनुसंगिक और सहयोगी है। अरूण कुमार पानी बाबा के घनिष्ठ मित्रों में शामिल रहे डा. ओंकार मित्तल ने अरूण कुमार पानी बाबा के व्यक्तित्व और लेखन के विशिष्ट पहलुओं की सराहना की और कहा कि पूर्णिमा जी ने अपने पति अरूण कुमार पानी बाबा के अप्रकाशित उपन्यास सुरजन का राजू को प्रकाशित कराकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है। अरूण कुमार के साथ बीस वर्षों तक जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल (देवबंद) ने लोकार्पण समारोह में पधारे सभी विद्वतजनों का धन्यवाद और आभार जताया।

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