सहारनपुर में पीएम आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 10 हजार आवासों पर अनियमितता के आरोप से मचा हड़कंप

सहारनपुर में पीएम आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 10 हजार आवासों पर अनियमितता के आरोप से मचा हड़कंप

सहारनपुर में पीएम आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 10 हजार आवासों पर अनियमितता के आरोप से मचा हड़कंप

 

बजरंग दल नेता विकास त्यागी की एक वर्ष पुरानी शिकायत पर लंबी जांच प्रक्रिया और तथ्यों के सत्यापन के बाद अब इस घोटाले की परतें खुलनी हुई शुरू

 

जनपद में लगभग 14 हजार आवासों की डीपीआर तैयार की गई, जिनमें से करीब 12 हजार आवासों को स्वीकृति मिली, स्वीकृत आवासों में मात्र 2 हजार ही वैध, जबकि करीब 10 हजार आवासों को नियमों के विपरीत अवैध तरीके से स्वीकृत किया गया है : विकास त्यागी

 

(गौरव सिंघल)

सहारनपुर। सहारनपुर

जनपद में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत चल रहे एक वृहद और संगठित भ्रष्टाचार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत लगभग एक वर्ष पूर्व बजरंग दल मेरठ प्रांत के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी द्वारा जिलाधिकारी को दी गई एक विस्तृत शिकायत से हुई थी। विकास त्यागी ने साक्ष्यों के साथ डूडा विभाग में कार्यरत एक एमआईएस कर्मचारी और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप लगाया था। लंबी जांच प्रक्रिया और तथ्यों के सत्यापन के बाद अब इस घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुई हैं, जिससे हड़कंप मचा हुआ है। विकास त्यागी द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, उक्त एमआईएस कर्मचारी ने अपने पद और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करते हुए फर्जी आधार कार्ड व कूटरचित दस्तावेजों के सहारे अपात्रों को योजना का लाभ पहुँचाया।

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विकास त्यागी ने आरोप लगाया कि जनपद में लगभग 14 हजार आवासों की डीपीआर तैयार की गई थी, जिनमें से करीब 12 हजार आवासों को स्वीकृति भी मिल चुकी है। लेकिन आरोप है कि इन स्वीकृत आवासों में मात्र 2 हजार ही वैध है, जबकि करीब 10 हजार आवासों को नियमों के विपरीत अवैध तरीके से स्वीकृत किया गया है। विकास त्यागी ने इस मामले को शासन के संज्ञान में लाते हुए स्पष्ट किया कि स्वीकृत आवासों में एक विशेष वर्ग की अत्यधिक संख्या किसी बड़े सामाजिक और प्रशासनिक षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होती है। चूंकि आरोपी का भाई ग्राम मुगल माजरा का प्रधान है, इसलिए इस पूरे नेटवर्क के तार स्थानीय प्रशासन से लेकर विभाग के उच्च स्तर तक जुड़े होने की प्रबल आशंका है। विकास त्यागी ने बताया कि एक वर्ष पूर्व की गई उनकी शिकायत पर अब जिलाधिकारी के कड़े रुख के बाद उप जिलाधिकारी सदर और तहसीलदार की प्रारंभिक रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। डूडा कार्यालय ने संबंधित एमआईएस अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगते हुए तीन दिन के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। विकास त्यागी ने सरकार से मांग की है कि इस करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच हेतु एक विशेष जांच समिति (SIT) गठित की जाए, ताकि इसमें शामिल भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर उनके विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई और रिकवरी सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन अब इस पूरे नेटवर्क के अंतिम छोर तक पहुँचने की तैयारी में है, जिससे जरूरतमंदों के हक पर डाका डालने वाले दोषियों को सजा मिल सके।