गर्मी मे प्रशासन की आकडेबाजी

गर्मी मे प्रशासन की आकडेबाजी

गर्मी मे प्रशासन की आकडेबाजी

फोटो-2

3
1
2
3
4
18
7
WhatsApp Image 2023-03-27 at 13.05.32
12
6
16
5
13

बांदा-जिले में भीषण गर्मी के कहर लगातार जारी है। पिछले लगभग एक हफ्ते से यहां का तापमान 45 डिग्री के आसपास बना हुआ है।मौसम विभाग के अनुसार जनपद प्रदेश का ही नहीं बल्कि देश के सबसे गर्म जनपदों में शामिल है।जिसको लेकर सरकार व जिला प्रशासन एलर्ट व एडवायजरी जारी कर फार्मेलिटि तो पूरा करता दिखाई दे रहा है।भले ही कोई व्यवस्था ना की जाए लेकिन कागजों मे तो एडवायजरी जारी कर आनें वाली समस्या से पल्ला तो झाडा जा सकता है।भीषण गर्मी की इस मार से प्रत्येक नागरिक,मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को दायित्व सरकार व जिला प्रशासन का होता है। सरकार ने बीमार होने की दशा में अस्पतालों में गर्मी से बचाव को लेकर जो भी दवाएं व अन्य व्यवस्थाएं हैं उनको भी दुरुस्त रखने को आदेशित किया जाना बताया जा रहा है।जनपदों में दोपहर में मजदूरों को काम न करने को लेकर जागरूक करनें के निर्देश देने को कहा गया।वही अपरजिलाधिकारी व जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद मे 20 अप्रैल से भीषण गर्मी पड़नी शुरू हो गई है और यहां का तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया है।जिसको लेकर लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।जिसमें लोगों से कहा गया है कि दोपहर 12 बजें से लेकर शाम 4 बजे तक अगर जरूरत न हो तो घरों से न निकलें।धूप में काम करने वाले मजदूर वर्ग के लोगों से लगातार अपील की जा रही है कि दोपहर के समय धूप में काम बिल्कुल न करें और छांव में ही काम करें।इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देशित किया गया है और सभी सरकारी अस्पतालों व अन्य सभी को सक्रिय किया गया है कि हीट वेव से बचाव को लेकर जो भी व्यवस्थाएं अस्पतालों में होनी चाहिए उनको दुरुस्त रखा जाए। साथ ही लोगों को हीट वेव से बचने को लेकर जागरूक भी किया जाए।शहर में जहां पर लोगों की अत्यधिक भीड़ होती है।वहां पर पानी के टैंकरों की व्यवस्था करवाई जाए।वाटर कूलर आदि को भी सुचारू रूप में चलाने के संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं।आंकडा देते हुए अपर जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में 37000 हैंडपंप है जो चल रहे हैं।उनकी लगातार निगरानी करने के सभी को निर्देश दिए गए हैं।आकडें बाजी वा कलाबाजी मे मशहूर जिला प्रशासन कागजों मे तो राम राज्य की बात करता दिखाई देता है भले ही जमीनी हकीकत मे काम शून्य हो।कहने वाला कौन है।शहर मे शायद ही कही वाटर कूलर चालू हो या कही पर पौशाला की व्यवस्था की गयी हो।वही गौशालाओं मे तो गोवंशों की मानों आफत ही आ गयी है जो भूख व प्यास से दम तोडनें को मजबूर है।

———————-