किशनगढ़ राजस्थान में किशनगढ़ कला अकादमी द्वारा किया गया सम्मान
किशनगढ़ राजस्थान में किशनगढ़ कला अकादमी द्वारा किया गया सम्मान ,,

किशनगढ़ राजस्थान में
किशनगढ़ कला अकादमी द्वारा किया गया सम्मान ,,
कलाकार संस्कृति का जनक है और कला उसका आईना : मिलाप चंद जैन
तीन दिवसीय राष्ट्रीय कला शिविर संपन्न
मदनगंज-किशनगढ़। 14 अप्रैल, श्री रतनलाल कंवरलाल पाटनी गर्ल्स कॉलेज के ड्राइंग एंड पेंटिंग डिपार्मेंट व किशनगढ़ कला अकादमी के तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कला शिविर का मंगलवार को रंगारंग समापन हुआ।
अकादमी के मुकेश कुमावत के अनुसार इस राष्ट्रीय कला शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए हुए कलाकारों ने तीन दिन तक यहां निवास करते हुए अपनी-अपनी शैली में कलाकृतियों का सृजन किया। जिसका समापन मंगलवार को कलाकारों के सम्मान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत आईएएस अमरचंद शर्मा थे तथा अध्यक्षता पेंशनर समाज संस्था के अध्यक्ष मिलापचंद जैन ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षा विभाग के सेवानिवृत उप निदेशक दीपक जौहरी, आयकर विभाग जीएसटी अजमेर के मुख्य कर अधिकारी एच के कविया, दयानंद महाविद्यालय अजमेर की कला विभाग की अध्यक्ष डॉ रितु शिल्पी, डा. अनीता शर्मा, राजकीय कन्या महाविद्यालय अजमेर की सहायक प्रोफेसर डॉ निहारिका सिंह एवं रतनलाल कंवरलाल पाटनी गर्ल्स कॉलेज की अर्थशास्त्र विभाग की डीन रुचि शर्मा मौजूद थे।
मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत आईएएस अमरचंद शर्मा ने उत्तर प्रदेश मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ चित्रकार प्रवीण कुमार सैनी सम्भल की डॉ ममता राजपूत मेरठ के अरुण कुमार, जयपुर की डॉ शकुंतला महावार , अलीगढ़ की डॉक्टर अनुपम राघव ,को *राष्ट्रीय कला सम्मान प्रदान किया
और कहा कि एक समर्पित कलाकार एक संवेदनशील प्राणी होता है जो समाज व संस्कृति का परिचायक होता है तथा कलाकृतियां संस्कृति व समाज का आईना होती है। अध्यक्ष के रूप में बोलते हुए मिलापचंद जैन ने कहा कि इस तरह के कला शिविरों का आयोजन किशनगढ़ के लिए निरंतर होना आवश्यक है। किंतु किशनगढ़ जैसे कला के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध शहर में कला दीर्घा का नहीं होना बड़े खेद का विषय है। इसके लिए शासन-प्रशासन एवं कलाकारों को सामूहिक रूप से प्रयास कर कला दीर्घा की स्थापना करनी चाहिए। शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त उपनिदेशक दीपक जौहरी ने कहा कि किशनगढ़ की कला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी निजी पहचान रखती है जिसका कोई सानी नहीं है।कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के चित्र का माल्यार्पण एवं दीप प्रचलन के साथ हुआ समस्त अतिथियों का माला व संस्था की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया।
इस अवसर पर उत्तरप्रदेश के कला एवं संस्कृति विभाग की पंजिकृत कलाकार मिष्ठी राजपूत व पीहू वर्मा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। सोमवार की संध्या में किशनगढ़ के प्रसिद्ध हवेली संगीत के विशेषज्ञ एवं किशनगढ़ राजदरबार के कीर्तनकार जुगलकिशोर व टीम ने हवेली संगीत की प्रस्तुतियों से आगंतुक कलाकारों को किशनगढ़ की कला व संगीत से मंत्रमुग्ध कर दिया।
कला शिविर में किशनगढ़ शैली के ख्यातनाम चित्रकार शहजाद अली, शंकर सिंह राठौड़, विजय सिंह परिहार, भागचंद मालाकार, राकेश प्रजापत, राकेश कुमावत, हेमंत गोस्वामी, अजमेर के सचिदानंद साखलकर, देवेंद्र खारोल, पुष्पकांत मिश्रा, संभल उत्तर प्रदेश की ममता राजपूत, डॉक्टर अनुपम राघव, विदिशा के सुरेश भारद्वाज, मुजफ्फरनगर के प्रवीण सैनी, मेरठ के अरुण कुमार, बीकानेर की नेहा छिपा, यशवर्धन व्यास, राजकीय महाविद्यालय कोटा के सहायक प्रोफेसर डॉ अचल अरविंद, नावां के महेश कुमावत सहित अनेक कलाकार मौजूद थे। सभी कलाकारों ने तीन दिन तक अपनी-अपने शैली में अपने कलाकृतियों का सृजन किया। जिनकी शिविर के अंतिम दिन प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी में रखे गए चित्रों को देखकर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।
इस अवसर पर देश के विख्यात कलाकार कलाविद् राम जैसवाल को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर बिरदी चंद मालाकार ने किया तथा ओमप्रकाश पायक ने आभार व्यक्त किया।

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