देवबंद के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी बाहरा में अक्षय तृतीया पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया

देवबंद के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी बाहरा में अक्षय तृतीया पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया

देवबंद के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी बाहरा में अक्षय तृतीया पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया इस पावन पर्व पर णमोकार महामंत्र जैन सभा (रजि.) देवबंद द्वारा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर की बाहरे में प्रातः भक्तांमर विधान का आयोजन किया गया सर्वप्रथम जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ का अभिषेक, शांतिधारा किया गया (गौरव सिंघल) देवबंद (सहारनपुर)।देवबंद के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी बाहरा में अक्षय तृतीया पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पर्व का जैन दर्शन में विशेष महत्व है। इस दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ को राजा श्रेयांस द्वारा इक्षु रस से आहार कराया गया तब से यह पर्व दान पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस पावन पर्व पर णमोकार महामंत्र जैन सभा (रजि.) देवबंद द्वारा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर की बाहरे में प्रातः भक्तांमर विधान का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ का अभिषेक,शांतिधारा किया गया। शांति धारा की बोली अंकित कुमार अविरल जैन ने प्राप्त की। इसके उपरांत भक्तांमर विधान के मांडले पर पांच कलश स्थापित करने की बोली कम्र से श्रीमती सविता जैन, श्रीमती नीलिमा जैन, श्रीमती नूतन जैन, श्रीमती ऊषा जैन, श्रीमती जूही जैन और दीपक स्थापित करने की बोली श्रीमती अर्चना जैन ने प्राप्त की। यह बोलियां होने के उपरांत नित्य-नियम पूजा व भक्तांमर विधान पूजा की गई। सभा के संस्थापक अंकित जैन ने बताया कि अक्षय तृतीया पावन पर्व जैन धर्म में एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक दिवस है, जो प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के वर्षीतप के पारणे की याद में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर, जैन धर्म में भगवान आदिनाथ के मोक्ष मार्ग और संयम के प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में भक्तंबर विधान और विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। सभा के अध्यक्ष अंकित जैन ने कहा कि भक्तंबर स्तोत्र की महिमा आचार्य मानतुंग द्वारा रचित भक्तंबर स्तोत्र के 48 काव्यों के माध्यम से भगवान आदिनाथ की स्तुति की जाती है। यह विधान आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और क्लेशों के नाश के लिए किया जाता है। महामंत्री ऋषभ जैन ने कहा कि जैन धर्म के अनुसार, प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) को एक वर्ष एक महीना 13 दिन बाद पहला आहार प्राप्त हुआ था। उन्होंने वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) के दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस के हाथों गन्ने के रस (इक्षुरस) का पारणा किया था। वही कोषाध्यक्ष डॉक्टर पारस जैन ने बताया कि हमारी संस्था द्वारा इस पावन पर्व रात्रि में श्री जी की आरती भक्तांमर अनुष्ठान और धार्मिक तंबोला का आयोजन किया जाएगा। इस विधान में बाल ब्रह्मचारी अभय भैया, अजय जैन, श्री चंद जैन, अश्वनी जैन, सरिता जैन, सविता जैन, प्रदीप जैन, अर्चना जैन, उर्मिला जैन, मोना जैन सहित समस्त जैन समाज उपस्थित रहा।